बाढ़ प्रबंधन, सड़क संपर्क और सौर ऊर्जा को लेकर बड़ी बैठक, बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का CM ने लिया अपडेट
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज गंगा, गंडक एवं कोसी नदी परियोजना, बक्सर-भागलपुर ग्रीन फिल्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना, 2400 (3x800) मेगावाट पीरपैंती प्लांट तथा पीएम कुसुम योजना से संबंधित प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा बैठक हुई।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आज गंगा, गंडक एवं कोसी नदी परियोजना, बक्सर-भागलपुर ग्रीन फिल्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना, 2400 (3x800) मेगावाट पीरपैंती प्लांट तथा पीएम कुसुम योजना से संबंधित प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में बाढ़ प्रबंधन, सड़क संपर्क तथा सौर ऊर्जा से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चन्द्रशेखर सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव श्री अजय यादव एवं पथ निर्माण विभाग के सचिव श्री पंकज कुमार पाल ने अपने-अपने विभागों से संबंधित योजनाओं के संबंध में विस्तृत जानकारी दी।
कोसी नदी प्रणाली की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी एक गतिशील एवं आपस में जुड़ी हुई नदी प्रणाली है। इसके प्रबंधन के लिए केवल वार्षिक बाढ़ प्रतिक्रिया तक सीमित रहने के बजाय दीर्घकालिक बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण की रणनीति के तहत कार्य किया जाए। उन्होंने कोसी क्षेत्र को लोगों, संपत्तियों और कनेक्टिविटी से जुड़े बहु-जिला नदी गलियारे के रूप में देखते हुए समग्र दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने गाद प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने तथा नए बैराज के निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को कहा। गंडक नदी से संबंधित योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने तटबंधों पर सोलर प्लांट लगाने की दिशा में भी कार्य करने का निर्देश दिया।
पथ निर्माण विभाग की समीक्षा के दौरान बक्सर भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की प्रगति पर चर्चा हुई। इस परियोजना की कुल लंबाई 348.196 किलोमीटर है, जिसमें 336.205 किलोमीटर बिहार तथा लगभग 12 किलोमीटर उत्तर प्रदेश में है। मुख्यमंत्री ने इसके अतिरिक्त गंगा-अंबिका पथ (बिदुपुर दिघवारा), नारायणी पथ (दरिहारा-डुमरिया घाट) और विश्वामित्र पथ (बक्सर आरा-मनेर) से संबंधित परियोजनाओं की भी समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान पीरपैंती तापीय विद्युत परियोजना की प्रगति पर चर्चा हुई। इस परियोजना की क्षमता 3X800 मेगावाट है। इसके साथ ही बांका तापीय विद्युत संयंत्र से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पीएम कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन की प्रगति की जानकारी ली और इसे तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र को पर्याप्त एवं भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ सौर ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने राजकीय नलकूपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में भी तेजी से कार्य करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रबंधन को लेकर स्थायी समाधान की दिशा में कार्य योजना बनाकर कर कार्य करना है। गंगा नदी, कोसी नदी एवं गंडक नदी को व्यवस्थित करना है। इसके दोनों तरफ तटबंधों का मजबूतीकरण करते हुये उस पर फोरलेन सड़क का निर्माण करना है। गंगा नदी, कोसी नदी एवं गंडक नदी क्षेत्र में बाढ़ प्रभावित लोगों को स्थायी राहत प्रदान करने के साथ-साथ इस क्षेत्र को समृद्ध क्षेत्र बनाना है। कोसी क्षेत्र के शुरूआती 100 किलोमीटर जो विशेष डेंजर जोन है, उस पर डबल शीट पायलिंग करने की आवश्यकता है। नदियों का गाद निकालने से जल संग्रहण एवं प्रवाह क्षमता भी संयमित होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी संबंधित विभाग परियोजनाओं की नियमित निगरानी, आपसी समन्वय और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करें, ताकि राज्य में जल संसाधन, सड़क कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र की आधारभूत संरचना को और मजबूत किया जा सके।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, मुख्यमंत्री के सचिव श्री संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ० चन्द्रशेखर सिंह एवं बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सौरभ जोरवाल उपस्थित थे।










