रामानंद के हाथ में बांकीपुर में लालटेन, रिजल्ट चौंका देगा?
बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और जन सुराज पार्टी के बीच मुकाबला दिलचस्प होता जा रहा है। इसी बीच राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के यूरोप दौरे पर होने से पार्टी के चुनाव प्रचार को लेकर भी चर्चा तेज है। तेजस्वी की अनुपस्थिति में राजद ने चुनावी अभियान की जिम्मेदारी अपने वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. रामानंद यादव को सौंपी है।
डॉ. रामानंद यादव बिहार की राजनीति के अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वे लंबे समय तक विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और वर्तमान बांकीपुर क्षेत्र, जो पहले पटना (पश्चिम) विधानसभा क्षेत्र के नाम से जाना जाता था, से दो बार विधायक रह चुके हैं। इसी अनुभव और स्थानीय राजनीतिक पकड़ को देखते हुए राजद नेतृत्व ने उन्हें चुनाव प्रचार की कमान सौंपी है।
राजद इस उपचुनाव में रेखा कुमारी को मैदान में उतार चुकी है। पार्टी को उम्मीद है कि डॉ. रामानंद यादव की सक्रियता और संगठन पर उनकी पकड़ का लाभ प्रत्याशी को मिलेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर सीट पर सवर्ण मतदाताओं के बाद वैश्य और यादव समुदाय का प्रभाव काफी अहम है। रेखा कुमारी वैश्य समाज से आती हैं, जबकि डॉ. रामानंद यादव की यादव समाज में मजबूत पकड़ मानी जाती है। ऐसे में राजद सामाजिक समीकरणों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
हालांकि, चुनाव प्रचार के शुरुआती दौर में भाजपा और जन सुराज पार्टी की तुलना में राजद कुछ पीछे दिखाई दे रही है। भाजपा ने इस सीट पर पूरी ताकत झोंक दी है, जबकि जन सुराज पार्टी भी लगातार जनसंपर्क अभियान चला रही है। ऐसे में राजद के सामने चुनावी रफ्तार बढ़ाने की चुनौती है।
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा नेता नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। इस सीट पर सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी है और आने वाले दिनों में चुनाव प्रचार और अधिक तेज होने की संभावना है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति में डॉ. रामानंद यादव पार्टी संगठन को कितना प्रभावी ढंग से संभाल पाते हैं और क्या राजद इस उपचुनाव में भाजपा और अन्य दलों को कड़ी चुनौती देने में सफल हो पाती है। बांकीपुर का यह उपचुनाव बिहार की राजनीति के लिए प्रतिष्ठा का मुकाबला माना जा रहा है।
अनूप नारायण सिंह
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