पहले कटा पत्नी का एमपी का टिकट, अब पति से भी छीन ली सुरक्षा
पूर्व सांसद कविता सिंह के पति अजय सिंह की सरकारी सुरक्षा वापस, राजपूत राजनीति में उठे सवाल।सिवान की पूर्व जदयू सांसद कविता सिंह के पति और जिले के चर्चित राजनीतिक चेहरे अजय कुमार सिंह को मिली सरकारी सुरक्षा वापस लेने के आदेश के बाद बिहार की राजनीति, खासकर राजपूत समाज की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। अजय सिंह का राजनीतिक परिवार लंबे समय से सिवान की राजनीति में प्रभावशाली रहा है। उनकी मां जगमतो देवी विधायक रह चुकी हैं, जबकि उनकी पत्नी कविता सिंह भी विधायक बनने के बाद वर्ष 2019 में सिवान से पहली महिला सांसद निर्वाचित हुई थीं।
हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरणों के चलते एनडीए ने सिवान की बजाय शिवहर से लवली आनंद को उम्मीदवार बनाया और कविता सिंह का टिकट कट गया। इसके बाद 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में भी न तो कविता सिंह और न ही अजय सिंह को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया। विधान परिषद सहित कई राजनीतिक अवसरों पर भी दोनों को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिली।
वर्तमान में कविता सिंह जनता दल (यू) की राष्ट्रीय समिति में आमंत्रित सदस्य हैं। अब उनके पति अजय सिंह की सुरक्षा वापस लिए जाने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी देखा जा रहा है। सिवान ही नहीं, बिहार की राजपूत राजनीति में भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। अजय सिंह सिवान ही नहीं पूरे बिहार में एक स्थापित राजपूत नेता है। उनकी सुरक्षा उसे वक्त वापस ली गई है जब पत्नी का टिकट कटने के बावजूद उनकी पत्नी और वह पूरी ईमानदारी के साथ अपनी पार्टी जदयू के साथ खड़े हैं। यह भी एक बड़ा सवाल खरा करता है कि आखिर सिवान में जदयू को अपने पैरों पर खड़ा करने वाले अजय सिंह के साथ कौन साजिश कर रहा है।
पत्र में क्या कहा गया है?
6 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक, सिवान के कार्यालय से जारी पत्र (ज्ञापांक 2587) में अजय कुमार सिंह को संबोधित करते हुए कहा गया है कि बिहार पुलिस मुख्यालय (सुरक्षा प्रभाग), पटना के पत्रांक 734, दिनांक 2 जुलाई 2026 के आलोक में विशेष सुरक्षा समिति के निर्णय के अनुसार उनके साथ प्रतिनियुक्त सुरक्षा कर्मी (अंगरक्षक) की स्वीकृति प्रदान नहीं की गई है। इसी आधार पर अजय सिंह के साथ प्रतिनियुक्त अंगरक्षक को तत्काल प्रभाव से वापस करने का अनुरोध किया गया है। पत्र की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा), बिहार, थाना सिरसांव, पुलिस केंद्र सिवान तथा संबंधित अंगरक्षक को भी भेजी गई है।
आदेश में संबंधित अंगरक्षक सिपाही संख्या 716 विकास कुमार को तत्काल पुलिस केंद्र, सिवान में योगदान देने का निर्देश दिया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जदयू और बिहार सरकार इस पूरे मामले पर क्या स्पष्टीकरण देती है और क्या यह फैसला केवल सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर लिया गया है या इसके पीछे राजनीतिक कारण भी हैं। विपक्ष और राजपूत समाज के कई लोग इस मुद्दे को राजनीतिक उपेक्षा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि प्रशासनिक पक्ष से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
अनूप नारायण सिंह
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