नीतीश के विधायक ने सदन में घेर लिया सरकार को, तभी उठ खड़े हुए CM सम्राट चौधरी
बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। दूसरे दिन भी सदन के बाहर और अंदर विपक्षी सदस्य अलग-अलग मुद्दों को लेकर सम्राट सरकार को घेरती नजर आई। सदन में प्रश्नकाल का दौर जारी है। जेडीयू विधायक श्याम रजक ने बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया तो खुद सीएम सम्राट चौधरी को जवाब देना पड़ा।
दरअसल जदयू विधायक श्याम रजक ने सदन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालयों की बदहाली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में 62 फीसदी शिक्षकों की कमी है। इसपर बिहार सरकार के एससी-एसटी मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि शिक्षकों की भर्ती को लेकर बीपीएससी को अधियाचना भेजी गई है। मंत्री लखींद्र पासवान के इस पारंपरिक जवाब पर विधायक श्याम रजक ने असंतोष जताया और नाराजगी व्यक्त की।
श्याम रजक ने सरकार से पूछा कि सिर्फ अधियाचना भेजने से काम नहीं चलेगा, सरकार यह स्पष्ट करे कि इन स्कूलों को नए शिक्षक कब तक मिल जाएंगे। उन्होंने बहाली प्रक्रिया को पूरा करने के लिए एक निश्चित समय सीमा बताने की मांग की। इस पर मंत्री लखींद्र पासवान ने दोबारा कहा कि सरकार की मंशा साफ है और वे खुद चाहते हैं कि बिना किसी देरी के जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति धरातल पर उतरे।
वहीं, इस मुद्दे पर जब सदन में विधायकों की नाराजगी और बहस बढ़ती दिखी, तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने खुद हस्तक्षेप किया। सीएम सम्राट चौधरी ने इसपर जवाब देते हुए कहा कि ये अति गंभीर है। सदन के सदस्य की चिंता भी गंभीर है। मैं शिक्षा विभाग को इसकी मॉनिटरिंग के लिए कहूंगा। सम्राट चौधरी ने इसके बाद भरोसा दिया कि एक महीने के अंदर शिक्षकों की बहाली पूरी कर ली जाएगी। सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और एक महीने के अंदर इन विद्यालयों में शिक्षकों की बहाली सुनिश्चित कर ली जाएगी।
वहीं बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी विधायकों ने जोरदार हंगामा किया। कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्ष के सदस्य वेल में पहुंच गए। काला बिल्ला लगाकर विरोध जताया। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने विपक्ष को आश्वस्त करते हुए कहा कि सदन की सहमति के बिना कोई नया कानून या संशोधन पारित नहीं किया जाएगा और किसी भी नए टैक्स को बिना सदन में चर्चा के लागू नहीं किया जाएगा।
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