लक्ष्मण नारायण शर्मा कैसे बना 'नीम करौली बाबा', परिवार में कौन-कौन, स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक...
नीम करौली बाबा की जिंदगी और उनकी आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रही है। आखिर उन्हें ‘नीम करौली बाबा’ नाम कैसे मिला? वह हमेशा कंबल ओढ़े हुए क्यों नजर आते थे? आइये इस आर्टिकल में आगे सब जानते हैं।

नीम करौली बाबा की जिंदगी और उनकी आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्डतोड़ कमाई कर रही है। महज 2 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने एक महीने के अंदर 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। इस फिल्म के बाद भगवान हनुमान के परम भक्त माने जाने वाले नीम करौली बाबा के जीवन को लेकर लोगों की उत्सुकता काफी बढ़ गई है। लोग उनकी जिंदगी और परिवार के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते हैं। बताया जाता है कि नीम करौली बाबा का जीवन बेहद सादगीपूर्ण था, लेकिन उनसे जुड़ी कई घटनाएं आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय हैं। आखिर उन्हें ‘नीम करौली बाबा’ नाम कैसे मिला? वह हमेशा कंबल ओढ़े हुए क्यों नजर आते थे? आइये इस आर्टिकल में आगे सब जानते हैं।
नीम करौली बाबा का नाम केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी आध्यात्मिकता और सेवा की भावना से जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड के कैंची धाम से लेकर अमेरिका तक उनके भक्तों और अनुयायियों की एक बड़ी संख्या है। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स से लेकर फेसबुक के सह-संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स तक का नाम भी बाबा से जुड़ी प्रेरक कहानियों में सामने आता है।
नीम करौली बाबा का जन्म उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के अकबरपुर गांव में करीब 1900 के आसपास हुआ था। बचपन से ही उनका झुकाव अध्यात्म की ओर बताया जाता है। कहा जाता है कि महज 11 साल की उम्र में उनकी शादी राम बेटी देवी से हो गई थी। इसके बावजूद उनका मन सांसारिक जीवन में ज्यादा नहीं लगा और आगे चलकर उन्होंने आध्यात्मिक मार्ग अपना लिया। मान्यता है कि करीब 17 साल की उम्र में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बाद में उन्होंने साधु जीवन अपनाने के लिए घर छोड़ दिया। हालांकि, परिवार और पिता के आग्रह पर वह कुछ समय बाद वापस अपने वैवाहिक जीवन में लौट आए।
नीम करौली बाबा के बारे में एक दिलचस्प बात यह भी बतायी जाती है कि वह अपने गांव में करीब 40 वर्षों तक निर्विरोध ग्राम प्रधान रहे। साधारण जीवन जीने वाले बाबा बाद में आध्यात्मिक गुरु के रूप में प्रसिद्ध होते चले गये। उनकी लोकप्रियता धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों में फैल गयी और उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गयी।
नीम करौली नाम कैसे पड़ा?
बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। ‘नीम करौली’ नाम उत्तर प्रदेश के नीम करौली गांव से जुड़ा माना जाता है। प्रचलित कथा के अनुसार, बाबा एक बार ट्रेन में बिना टिकट यात्रा कर रहे थे और उन्हें उत्तर प्रदेश के नीम करौली स्टेशन पर उतार दिया गया। इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। लोगों के आग्रह पर बाबा को दोबारा ट्रेन में बैठाया गया और ट्रेन चल पड़ी। हालांकि इस घटना के अलग-अलग संस्करण प्रचलित हैं। इसी घटना के बाद उनका नाम नीम करौली बाबा के रूप में प्रसिद्ध होने की कथा कही जाती है। कहा जाता है कि नीम के पेड़ों के पास बाबा ने तपस्या की और वहां गुफाएं भी बनायी थीं। इसी वजह से आगे चलकर उन्हें नीम करौली बाबा के नाम से जाना जाने लगा। हालांकि, यह घटना मुख्यतः भक्तों और अनुयायियों के बीच प्रचलित कथा के रूप में मिलती है। उनका नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है। आगे चलकर वे साधु जीवन की ओर मुड़े और भक्तों के बीच ‘महाराज जी’ के नाम से भी प्रसिद्ध हुए।
हमेशा कंबल ओढ़े क्यों रहते हैं ?
बाबा नीम करौली भगवान हनुमान के परम भक्त थे। उनके अनुयायियों में उन्हें हनुमान जी का अंश या अवतार मानने की परंपरा भी रही है। कैंची धाम में भगवान हनुमान का मंदिर उनकी इसी भक्ति परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बाबा की तस्वीरों में उन्हें अक्सर कंबल ओढ़े हुए देखा जाता है और यही उनकी पहचान का हिस्सा बन गया। उनके कंबल को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं, लेकिन इसका कोई एक प्रमाणित कारण उपलब्ध नहीं है। कुछ अनुयायी इसे उनकी सादगी और वैराग्य का प्रतीक मानते हैं। बाबा अपने पहनावे को लेकर दिखावे से दूर रहते थे और साधारण कंबल में ही नजर आते थे। इसलिए कंबल धीरे-धीरे उनके व्यक्तित्व की पहचान बन गया।
स्टीव जॉब्स से विराट कोहली तक पहुंचे बाबा के दरबार
नीम करौली बाबा से जुड़ी सबसे चर्चित बातों में दुनिया की मशहूर हस्तियों का उनके आश्रम से जुड़ाव भी है। एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स, मेटा के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग और भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली का नाम भी बाबा और कैंची धाम से जुड़ी चर्चाओं में आता है। स्टीव जॉब्स भारत यात्रा के दौरान कैंची धाम पहुंचे थे। मार्क जुकरबर्ग भी यहां आए थे और उन्होंने बाद में इस यात्रा को अपने जीवन के महत्वपूर्ण अनुभवों में बताया। इन घटनाओं ने कैंची धाम को वैश्विक स्तर पर और अधिक प्रसिद्ध किया।
नीम करौली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में देह त्याग किया। हालांकि, उनके जाने के दशकों बाद भी उनके प्रति लोगों की श्रद्धा लगातार बनी हुई है। कैंची धाम में आज भी देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं और बाबा की स्मृति से जुड़े आध्यात्मिक अनुभवों को महसूस करने की बात कहते हैं।
बाबा नीम करौली के परिवार में कौन-कौन...
नीम करौली बाबा और राम बेटी देवी ने गृहस्थ जीवन में तीन संतानों का पालन-पोषण किया, लेकिन बाद में उनका झुकाव आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ता गया। उनके बड़े बेटे का नाम अनेक सिंह शर्मा और छोटे बेटे का नाम धर्म नारायण शर्मा था। उनकी बेटी का नाम गिरिजा देवी, जिन्हें बाद में गिरिजा भाटेले के नाम से भी जाना गया।
बड़े बेटे अनेक सिंह शर्मा अपने परिवार के साथ भोपाल में रहते थे। रिपोर्टों के अनुसार उनका नवंबर 2021 में निधन हो गया। छोटे बेटे धर्म नारायण शर्मा वन विभाग में रेंजर के पद पर कार्यरत रहे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने वृंदावन में रहकर आध्यात्मिक जीवन बिताया। उनका अप्रैल 2021 में निधन हो गया. नीम करौली बाबा की तीसरी संतान उनकी बेटी गिरिजा देवी, जिन्हें कुछ जगहों पर गिरिजा भाटेले के नाम से भी उल्लेखित किया जाता है। बताया जाता है कि वह आगरा में रहती हैं।










