बड़कागांव सीएचसी में बडी घटना, दवाओं की हेराफेरी का आरोप, दवा ले जाते पकडाये सेवानिवृत्त एएनएम के पति
झारखंड के हजारीबाग जिले से बडी और अहम खबर है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानि सीएचसी में सरकारी दवाओं की कथित तौर पर हेराफेरी और अवैध निकासी का बडा मामला सामने आया है।

झारखंड के हजारीबाग जिले से बडी और अहम खबर है। यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र यानि सीएचसी में सरकारी दवाओं की कथित तौर पर हेराफेरी और अवैध निकासी का बडा मामला सामने आया है। इस खबर के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हडकंप मचा हुआ है। सीएचसी के एक गार्ड ने एक रिटायर्ड एएनएम के पति को इस मामले में रंगे हाथ पकडा है। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले की जांच में जुट गया है।
मिली जानकारी के अनुसार जिले के बड़कागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी दवाओं की कथित हेराफेरी और अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि अस्पताल के स्टोर कक्ष से महंगी सरकारी दवाएं निकालकर बाहर ले जाई जा रही थीं। इस मामले में बिहार निवासी यमुना प्रसाद, जो अंगो पंचायत की सेवानिवृत्त एएनएम मंजू देवी के पति बताए जाते हैं, को दवाओं से भरा झोला ले जाते हुए पकड़े जाने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार, 28 जुलाई 2026 की दोपहर करीब 12 बजे की है। आरोप है कि अस्पताल परिसर में सुनसान होने का फायदा उठाकर यमुना प्रसाद सीएचसी के स्टोर कीपर कक्ष में पहुंचे और वहां से एक झोले में सरकारी दवाएं भरकर बाहर निकालने लगे। इसी दौरान अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड आजाज मियां की नजर उन पर पड़ गई। गार्ड ने उन्हें रोककर पकड़ लिया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से बीच-बचाव किए जाने की बात सामने आई है। आरोप है कि यमुना प्रसाद ने सुरक्षा गार्ड से माफी मांगते हुए वहां से निकलने का प्रयास किया और बाद में मौके से फरार हो गए। इस मामले में रंजीत ठाकुर और नसरुद्दीन मियां के नाम भी सामने आए हैं। दोनों की भूमिका से जमुना प्रसाद वहां से फरार हो गया।
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि सेवानिवृत्त एएनएम मंजू देवी और उनके पति द्वारा लंबे समय से सरकारी दवाओं की कथित हेराफेरी की जा रही थी। आरोप है कि पिछले करीब 20 वर्षों से सीएचसी के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से अस्पताल के स्टोर से महंगी दवाएं निकालकर अवैध रूप से बेचने का काम चलता रहा। यह भी आरोप है कि सेवानिवृत्ति के बाद दंपति गांव में चिकित्सा संबंधी गतिविधियां संचालित कर रहे थे।। यमुना प्रसाद पर बिहार में खांसी की दवाओं के सिरप की कथित आपूर्ति करने का भी आरोप लगाया गया है। वहीं, अंगो पंचायत भवन में सेवानिवृत्ति के बाद भी कब्जा करने का आरोप लगा हुआ है। अब इसपर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीण ने रिटायर्ड होने के बाद भी पंचायत भवन को खाली नहीं करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार कहे जाने के बाद भी ये लोग पंचायत भवन को खाली नहीं किए हैं।
इधर मामला सामने आने के बाद बड़कागांव सीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ अविनाश कुमार ने इसे गंभीर बताते हुए कहा कि अस्पताल में कुछ आवश्यक दवाओं की कमी जैसे डिलोना दर्द का दवा नहीं रहने के कारण कई बार मरीजों की सुविधा के लिए बाहर से दवाओं की व्यवस्था करनी पड़ती थी। मामले की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने कानूनी कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। डॉ अविनाश कुमार के अनुसार, आरोपी यमुना प्रसाद के विरुद्ध गुरुवार तक प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही जांच में यदि अस्पताल के अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सरकारी स्वास्थ्य केंद्र की दवाओं की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब प्राथमिकी और जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि दवाओं की कथित हेराफेरी का मामला कितना व्यापक है किन-किन लोगों की भूमिका रही है।
हजारीबाग से सुनील कुमार ठाकुर की रिपोर्ट













