TDPL के कंप्यूटर से मिले चौंकाने वाले साक्ष्य, JPSC मामले में पूर्व अध्यक्ष से आज फिर पूछताछ

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार नए आयाम ले रही है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को पूछताछ और डिजिटल फोरेंसिक जांच के दौरान ऐसे अहम सुराग मिले हैं, जिनके बाद आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, डेटा में कथित छेड़छाड़, ओएमआर शीट से जुड़े बदलाव और परीक्षा प्रक्रिया में संभावित गड़बड़ियों को लेकर कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
इसी क्रम में CID ने पूर्व अध्यक्ष का पासपोर्ट अपने कब्जे में लेकर उनकी विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड भी खंगालना शुरू कर दिया है। उन्हें शुक्रवार को तीसरी बार पूछताछ के लिए बुलाया गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच की दिशा को देखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई, जिसमें गिरफ्तारी की संभावना भी शामिल है, से इनकार नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि 21 जुलाई की शाम JPSC कार्यालय में CID और रांची पुलिस की संयुक्त छापेमारी के बाद एल. ख्यांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अगले दिन राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया था।
इस बीच, मामले में CID ने हजारीबाग पुलिस के सहयोग से एक और अभ्यर्थी सुमन सौरभ को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा-2025 (विज्ञापन संख्या 01/2026) की प्रारंभिक परीक्षा अनुचित साधनों के जरिए उत्तीर्ण की थी। पूछताछ के दौरान उसने इस संबंध में स्वीकारोक्ति भी की है। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। इसके साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। यह कार्रवाई CID थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत की गई है।
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार अभ्यर्थी के पास ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी नहीं मिली। वहीं, फोरेंसिक जांच में परीक्षा संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल के कार्यालय से जब्त कंप्यूटरों में परीक्षा से जुड़े प्रश्न, उत्तर और ओएमआर शीट का डिजिटल डेटा मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसी का मानना है कि ये साक्ष्य परीक्षा में सुनियोजित तरीके से कथित हेराफेरी की ओर संकेत करते हैं।
उधर, CID मुख्यालय में गुरुवार को लगातार छठे दिन भी आठ आरोपियों से लंबी पूछताछ जारी रही। इनमें JPSC की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामबीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद एबाद के अलावा टीडीपीएल के कर्मचारी हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह तथा संजय कुमार शामिल हैं।
इसके अलावा, हाल ही में रिमांड पर लिए गए तीन अन्य आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर भी पूछताछ की गई। जांच एजेंसी अब आरोपियों के बयानों का मिलान डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों से कर रही है, ताकि कथित परीक्षा घोटाले की पूरी परतें सामने लाई जा सकें।













