निजी विद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए होगी मीटिंग, शिक्षा मंत्री ने दिया सुझाव
राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के निजी विद्यालयों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सितंबर के पहले सप्ताह में एक विशेष मीटिंग आयोजित करने का सुझाव दिया है।

राज्य के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने राज्य के निजी विद्यालयों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए सितंबर के पहले सप्ताह में एक विशेष मीटिंग आयोजित करने का सुझाव दिया है। यह बातें प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सैयद शमायल अहमद गुरुवार को राजधानी में कही। शमायल ने गुरुवार को शिक्षा मंत्री से मुलाकात के बाद कही।
सैयद शमायल अहमद ने बताया कि शिक्षा मंत्री से उनके सरकारी आवास पर शिष्टाचार मुलाकात हुई। यह मुलाकात अत्यंत सकारात्मक, सार्थक एवं परिणामदायी रही। इस अवसर पर उन्होंने शिक्षा मंत्री को एसोसिएशन द्वारा आयोजित होने वाले आगामी शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया। शिक्षा मंत्री ने आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए कार्यक्रम में उपस्थित होकर समारोह की गरिमा बढ़ाने की सहमति प्रदान की।
बैठक के दौरान बिहार की शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के साथ-साथ निजी विद्यालयों के समक्ष उत्पन्न विभिन्न समस्याओं, प्रशासनिक कठिनाइयों एवं व्यावहारिक चुनौतियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। शिक्षा मंत्री ने सभी विषयों को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुना तथा निजी विद्यालयों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारियों एवं विद्यालय प्रतिनिधियों के साथ सितंबर के पहले माह में एक विशेष बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया। उन्होंने समस्याओं एवं आवश्यक मांगों की विस्तृत सूची प्रस्तुत करने को भी कहा, ताकि उन पर क्रमबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
शमायल अहमद ने कहा कि शिक्षा मंत्री का सकारात्मक दृष्टिकोण निजी विद्यालयों के लिए अत्यंत आशाजनक है। उन्होंने हमारी समयानुकूल एवं न्यायसंगत मांगों को स्वीकार कर उनके समाधान का भरोसा दिलाया है। इसके लिए मैं उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार और निजी विद्यालय संगठनों के बीच समन्वय एवं नियमित संवाद से बिहार की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी तथा प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों और शिक्षकों के हित में ठोस एवं दूरगामी निर्णय लिए जा सकेंगे।










