सहकारिता विभाग के तीन बड़े प्रस्तावों को कैबिनेट की मंजूरी, गन्ना किसानों, मछुआरों को मिलेगा सीधा लाभ
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सहकारिता विभाग के तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में सहकारिता विभाग के तीन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। इससे राज्य में सहकारिता आंदोलन को नई गति मिलेगी और किसानों, विशेषकर गन्ना उत्पादक किसानों तथा मत्स्यजीवी समुदाय को सशक्त बनाया जा सकेगा।
कैबिनेट ने मत्स्यजीवी सहकारियों के लिए त्रि-स्तरीय ढांचे को मंजूरी दे दी गई है। तीसरे बड़े फैसले में कैबिनेट ने जिला/जिला समूह/प्रमंडल स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी संघ एवं राज्य स्तरीय मत्स्यजीवी सहकारी परिसंघ के गठन को स्वीकृति दी है। अब तक मत्स्यजीवी सहकारी समितियां बिखरी हुई थीं। नए त्रि-स्तरीय ढांचे के बनने से मछुआरों को मछली पालन के लिए प्रशिक्षण, चारा, जाल, बाजार और कोल्ड चेन की सुविधा एक ही छत के नीचे मिलेगी। राज्य स्तरीय परिसंघ के माध्यम से मछली उत्पादन को बढ़ावा देने और मत्स्यजीवियों को बिचौलियों से मुक्ति दिलाने की योजना है।
कैबिनेट ने सहकारी चीनी मिलों के अधिसूचित आरक्षित क्षेत्र (कमांड एरिया) के अंतर्गत प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समिति के गठन को स्वीकृति दे दी है। इस निर्णय से गन्ना आपूर्ति प्रणाली अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित होगी। अभी तक कई क्षेत्रों में किसान सीधे तौर पर समिति से नहीं जुड़ पाते थे, जिससे उन्हें गन्ना तौल, भुगतान और अनुदान में कठिनाई होती थी। नई प्राथमिक समितियों के गठन से छोटे और सीमांत गन्ना किसानों को सहकारी चीनी मिलों से सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे उन्हें समय पर भुगतान, उन्नत बीज, खाद और तकनीकी सहायता मिल सकेगी।
वहीं, कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में 48,200 (अड़तालीस हजार दो सौ) मीट्रिक टन भंडारण क्षमता के सृजन की योजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत समितियों द्वारा 200 मीट्रिक टन, 500 मीट्रिक टन एवं 1,000 मीट्रिक टन प्रति इकाई क्षमता के गोदामों का निर्माण कराया जाएगा। इस योजना के लिए कुल 34,95,27,730 रुपये (चौंतीस करोड़ पचानवे लाख सत्ताईस हजार सात सौ तीस रुपये मात्र) की स्वीकृति दी गई है।
इसमें समितियों को 50 प्रतिशत अनुदान तथा 50 प्रतिशत चक्रीय पूंजी के रूप में सहायता दी जाएगी। इससे पैक्स और व्यापार मंडलों की भंडारण क्षमता बढ़ेगी, किसानों की उपज को बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा और उन्हें अपनी फसल का उचित मूल्य मिल सकेगा। माना जा रहा है कि राज्य मंत्रिमंडल से स्वीकृत ये तीनों फैसले ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।











