सोशल मीडिया क्रिएटर्स की बल्ले-बल्ले, 1 लाख व्यूज पर ₹10 हजार तक मिलेगा, सम्राट सरकार का बड़ा तोहफा
बिहार सरकार ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को हुई सम्राट कैबिनेट की बैठक में 'बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया नीति/नियमावली' में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है।

बिहार सरकार ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन मीडिया के क्षेत्र में एक बड़ा फैसला लिया है। बुधवार को हुई सम्राट कैबिनेट की बैठक में 'बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया नीति/नियमावली' में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। सरकार ने सोशल मीडिया, वेब पोर्टल और अन्य ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से सरकारी योजनाओं एवं जनहितकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से यह फैसला लिया है। इस नीति के लागू होने से पात्र सोशल मीडिया क्रिएटर्स और ऑनलाइन मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए सरकारी विज्ञापन और भुगतान पाने का रास्ता साफ हो सकता है। इस नई पहल के माध्यम से सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं, विकास कार्यों और उपलब्धियों को डिजिटल माध्यमों से राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना चाहती है।
कैबिनेट के इस फैसले के मुताबिक बिहार सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों से संबंधित पात्र कंटेंट पर 1 लाख व्यूज मिलने पर अधिकतम ₹10,000 तक का भुगतान किया जा सकता है। इसी दर के आधार पर 10 लाख व्यूज वाले कंटेंट पर ₹1 लाख तक दिया जा सकता है। हालांकि, यह राशि हर वायरल पोस्ट या वीडियो पर अपने आप नहीं मिलेगा। भुगतान की अंतिम राशि सरकार द्वारा तय पात्रता, प्लेटफॉर्म के प्रकार, कंटेंट की गुणवत्ता और व्यूज के आधिकारिक सत्यापन के आधार पर तय होगा।
इस योजना का लाभ लेने के लिए व्यक्तिगत क्रिएटर्स और पंजीकृत कंपनियों को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से सरकार के साथ एम्पैनल (सूचीबद्ध) होना अनिवार्य होगा। बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर सोशल मीडिया पॉलिसी के तहत एम्पैनलमेंट की व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। बिना एम्पैनल्ड हुए या बिना विभागीय अनुमति के बनाए गए सामान्य कंटेंट पर इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। इसकी विस्तृत जानकारी बाद में जारी की जाएगी।
बता दें कि 'बिहार सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया नीति/नियमावली' में संशोधन के माध्यम से सोशल मीडिया पर पोस्ट या वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर मिलने वाले अतिरिक्त राशि के भुगतान को और अधिक स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य सोशल मीडिया के जरिए सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के प्रचार में भुगतान की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और व्यावहारिक बनाना है।
इसके तहत सूचीबद्ध सोशल मीडिया हैंडल, पेज और चैनल के फॉलोअर्स की समय-समय पर जांच की व्यवस्था की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास होगा कि सरकारी प्रचार-प्रसार के लिए सूचीबद्ध सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के फॉलोअर्स और उनकी वास्तविक पहुंच की स्थिति पर नजर रखी जा सके।

गैर-सूचीबद्ध सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को भी विज्ञापन का प्रावधान
संशोधन प्रस्ताव में विशेष परिस्थितियों में गैर-सूचीबद्ध प्रतिष्ठित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स को विज्ञापन देने का प्रावधान भी किया गया है। इसके अलावा, नियमावली में किसी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में आवश्यक स्पष्टीकरण देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित की गई है।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
सरकार के अनुसार इन संशोधनों का मुख्य उद्देश्य सोशल मीडिया एवं अन्य ऑनलाइन मीडिया के माध्यम से सरकारी योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और परिणामोन्मुखी बनाना है। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया की बढ़ती पहुंच को देखते हुए सरकारी योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक तेजी से पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया हैंडल, पेज, चैनल और इन्फ्लुएंसर्स की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।











