जेल भरो आंदोलन में उमड़ा किसानों-मजदूरों का सैलाब, हजारों प्रदर्शनकारी गिरफ्तार, पुलिस से भी नोकझोंक
अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय खेतिहर एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, सीटू सहित अन्य जनसंगठनों के राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत सोमवार को सहरसा में हजारों किसान-मजदूर, छात्र-नौजवान और महिलाएं सड़क पर उतरे।

सहरसा। अखिल भारतीय किसान सभा, अखिल भारतीय खेतिहर एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, सीटू सहित अन्य जनसंगठनों के राष्ट्रव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत सोमवार को सहरसा में हजारों किसान-मजदूर, छात्र-नौजवान और महिलाएं सड़क पर उतरे। जिला परिषद प्रांगण से निकले विशाल जुलूस में जिले के विभिन्न हिस्सों से लोग ट्रैक्टर, टेंपो, बस, रेलगाड़ी एवं पैदल पहुंचे। हाथों में लाल झंडे, बैनर और विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर प्रदर्शनकारियों ने शहर में जोरदार प्रदर्शन किया।
दोपहर में जिला परिषद परिसर से निकला जुलूस थाना चौक, वीर कुंवर सिंह चौक और अंबेडकर चौक होते हुए जिला समाहरणालय के मुख्य द्वार पर पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारी ‘कॉरपोरेट भारत छोड़ो’, ‘भाजपा भगाओ, देश बचाओ’, ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रद्द करो’, ‘भूमिहीनों को वास की जमीन दो’, ‘चार लेबर कोड रद्द करो’, ‘शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली का निजीकरण बंद करो’ समेत कई मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।
समाहरणालय के मुख्य द्वार पर पहले से तैनात पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शनकारी लगातार ‘गिरफ्तार करो, जेल भेजो’ के नारे लगाने लगे। गिरफ्तारी नहीं होने पर प्रदर्शनकारियों ने समाहरणालय का घेराव कर दिया और देखते ही देखते प्रदर्शन स्थल सभा में तब्दील हो गया।
कॉरपोरेट घरानों पर किसान-मजदूरों के शोषण का आरोप
कामरेड व्यास प्रसाद यादव की अध्यक्षता में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए किसान सभा के बिहार राज्य महासचिव विनोद कुमार ने केंद्र सरकार पर कॉरपोरेट घरानों के हित में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश के किसान और मजदूरों पर लगातार हमला हो रहा है। किसानों से जमीन छीनी जा रही है और उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। उन्होंने एमएसपी की कानूनी गारंटी देने तथा मजदूरों के अधिकार बहाल करने की मांग की।
किसान सभा के प्रांतीय संयुक्त सचिव रणधीर यादव ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से आम जनता परेशान है। उन्होंने पंचायतों पर प्रस्तावित विभिन्न टैक्स वापस लेने, भूमिहीनों को वास की जमीन देने तथा सीलिंग और भूदान की जमीन के पर्चाधारियों को दखल-दिहानी दिलाने की मांग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि भू-माफिया और प्रशासनिक गठजोड़ के कारण पर्चाधारियों को जमीन पर कब्जा दिलाने के बजाय बेदखल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के खिलाफ संघर्ष ही एकमात्र रास्ता बचा है।
भारी बारिश के बीच हजारों की गिरफ्तारी
सभा के बीच अनुमंडलाधिकारी सहरसा के आदेश पर पुलिस ने समाहरणालय मुख्य द्वार के आसपास से प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना शुरू किया। सदर थाना अध्यक्ष एवं अन्य पुलिस पदाधिकारी हजारों प्रदर्शनकारियों को स्टेडियम परिसर स्थित अस्थायी गिरफ्तारी केंद्र ले गए। भारी बारिश के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी गिरफ्तारी दर्ज कराने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाते रहे।
पुलिस प्रशासन को बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों की सूची तैयार करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में सभी गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को स्टेडियम परिसर स्थित अस्थायी केंद्र से रिहा कर अपने-अपने घर जाने का निर्देश दिया गया।
प्रदर्शन में किसान सभा, खेतिहर एवं ग्रामीण मजदूर यूनियन, सीटू, रसोईया यूनियन, एडवा, नौजवान सभा, एसएफआई, आशा संघ, आंगनबाड़ी संघ और ई-रिक्शा चालक यूनियन सहित विभिन्न संगठनों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। सभा के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने 23 सूत्री मांगों का स्मारपत्र जिला पदाधिकारी, सहरसा को आवश्यक कार्रवाई के लिए सौंपा।
सहरसा से विकास कुमार की रिपोर्ट




















