बिहार के हित में फरक्का जल संधि पर पुनर्विचार जरूरी, सूखा व बाढ़ झेल रहा बिहार: जदयू
राज्य के मुंगेर जिले में जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तीसरे चरण की शुरुआत सोमवार से ही लखीसराय से हुई।

पटना: राज्य के मुंगेर जिले में जदयू के ‘‘फरक्का जल संधि पर नीतीश संवाद’’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के तीसरे चरण की शुरुआत सोमवार से ही लखीसराय से हुई। इसके तहत राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के उन 12 जिलों में संवाद निर्धारित है, जो इस संधि के कारण सबसे अधिक प्रभावित हैं।
अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुई यह संधि भारत के, खासकर बिहार के हित में नहीं है, इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए और अगर कोई संधि होती भी है तो बिहार की वर्ष 2050 तक की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल-प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल-संकट का सामना कर रहे हैं। बिहार के हित में इस पर पुनर्विचार जरूरी है।
संजय कुमार झा ने कहा कि फरक्का (गंगा) जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम (एक जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) तक रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़ना पड़ता है, इसका मतलब यह है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है। बिहार और केन्द्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।
वहीं प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार शुरू से कहते रहे हैं कि फरक्का बराज और फरक्का जल संधि से बिहार को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक ओर फरक्का बराज के कारण गंगा में भारी गाद जमा हो जाने से नदी का तल ऊँचा हो गया है, जिसके कारण उत्तर बिहार को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है, तो दूसरी ओर फरक्का जल संधि के कारण शुष्क मौसम में हमें बिहार के हिस्से का पानी बांग्लादेश को देना पड़ता है और हमारे कई जिलों में सूखे तक की स्थिति हो जाती है। इस अंतर्राष्ट्रीय संधि का 73 प्रतिशत बोझ अकेले बिहार उठा रहा है और 30 वर्षों से एक साथ बाढ़ और सूखे का दंश झेल रहा है। यह हमारे साथ ज्यादती है, जिसे हम इस अभियान के माध्यम से बताना चाहते हैं। कुशवाहा ने संजय कुमार झा को धन्यवाद दिया कि उन्होंने संसद में इस मुद्दे को उठाया और उनके प्रयासों से यह राष्ट्रीय विमर्श का विषय बना।
विधायक नचिकेता मंडल एवं जिलाध्यक्ष सौरभ निधि ने इस मौके पर कहा कि पार्टी का यह अभियान बिहार के हक और बिहारवासियों के हित के लिए है। हमलोग अपनी आवाज केन्द्र तक पहुँचाना चाह रहे हैं ताकि गंगा से जुडे़ सवाल देश के सामने आएं और इस संधि पर पुनर्विचार हो। बिहार के हितों से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। नेताओं ने इस पहल के लिए पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को साधुवाद दिया और इस जन-जागरुकता अभियान को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
ज्ञात हो कि संवाद कार्यक्रम के पहले चरण में बक्सर, भोजपुर, बेगूसराय और खगड़िया जिले, तो दूसरे चरण में सारण, वैशाली, समस्तीपुर और पटना जिले शामिल थे। तीसरे चरण में लखीसराय और मुंगेर के बाद भागलपुर और कटिहार में संवाद कार्यक्रम निर्धारित है। बता दें कि बिहार में गंगा बक्सर से प्रवेश करती है और कटिहार से निकलती है। यही कारण है कि इस जन-जागरुकता अभियान का शुभारंभ पांच सितंबर को बक्सर से हुआ, जबकि समापन चार नवंबर को कटिहार में होगा। इस मौके पर बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर पार्टी द्वारा तैयार की गई डॉक्यूमेंट्री फिल्म खास तौर से दिखाई गई। साथ ही विस्तृत जानकारी वाला पम्फलेट भी बांटा गया।











