कस्तूरबा गांधी छात्रावास: गुटबाजी के चक्कर में जल रही बच्चियों की रोटी? जानिए क्या है वायरल तस्वीरों का पूरा सच
गोपालगंज के भोरे मिडिल स्कूल के अन्दर कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में छात्राओं की थाली तक पहुंचने वाली रोटी को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्राउंड रिपोर्टिंग में छात्रावास के अंदर एक अलग ही प्रशासनिक खींचतान और गुटबाजी नजर आ रही

गोपालगंज के भोरे मिडिल स्कूल के अन्दर कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास में छात्राओं की थाली तक पहुंचने वाली रोटी को लेकर उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया पर रुमाल में बंधी जली हुई रोटियों की तस्वीरें वायरल होने के बाद जहां शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने त्वरित संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं, वही सीपीआईएमएल माले और कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं। वहीं स्वराज पोस्ट की ग्राउंड ज़ीरो रिपोर्टिंग में छात्रावास के अंदर एक अलग ही प्रशासनिक खींचतान और गुटबाजी की परतें उधड़ती नजर आ रही हैं।
ग्राउंड ज़ीरो पर व्यवस्था बेहतर, लेकिन छात्रावास क़े अन्दर सुलग रही गुटबाजी
स्वराज पोस्ट की टीम जब ग्राउंड ज़ीरो पर कस्तूरबा गांधी छात्रावास पहुंची, तो प्रथम दृष्टया व्यवस्थाएं बेहतर नजर आईं। लेकिन इस साफ-सफाई और अनुशासन के पीछे अंदरूनी कलह का बड़ा केंद्र सामने आया। सूत्रों की मानें तो छात्रावास की वार्डन और कंप्यूटर टीचर के बीच लंबे समय से मनमुटाव चल रहा है। इस आपसी रंजिश और गुटबाजी का ही नतीजा है कि बच्चियों के निवाले को हथियार बनाकर यह विवाद सरेआम किया गया।
रसोइया और वार्डन का दावा: "पापड़ बनाने के चक्कर में बच्चियों से जली रोटी"
मामले पर छात्रावास में कार्यरत रसोइया इंद्रावती देवी ने सफाई देते हुए कहा कि छात्रावास में छात्राओं को हमेशा गुणवत्तापूर्ण और बेहतर भोजन दिया जाता है। उनका दावा है कि कभी-कभार छात्राएं खुद रोटी सेकने लगती हैं और उसी दौरान रोटियां जल जाती हैं।
वहीं, जली हुई रोटियों की तस्वीर वायरल होने पर वार्डन संध्या कुमारी ने सीधे तौर पर अंदर के ही लोगों पर साजिश का आरोप लगाया। संध्या कुमारी ने कहा,मुझे सिर्फ बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। अंदर के ही कुछ लोग है। जो बच्चियों का माइंडवॉश कर रहे हैं। गांव की कुछ बच्चियां हैं, जो पापड़ (कड़क रोटी) बनाने के चक्कर में रोटी जला देती हैं। यह महज एक शरारत है और कुछ नहीं।
बड़ा सवाल: तीन रसोइयों की मौजूदगी में भट्टी पर क्यों जाती हैं छात्राएं?
वार्डन और रसोइया भले ही इसे छात्राओं की शरारत बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस छात्रावास में बाकायदा तीन-तीन रसोइया तैनात हैं, वहां छात्राओं को भट्टी तक जाने की नौबत ही क्यों आती है।
इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरें किसी एक बच्ची की जली हुई रोटी की नहीं हैं। तस्वीरों को गौर से देखने पर साफ पता चलता है कि कई छात्राओं के रुमाल में बंधी जली रोटियां दिखाई दे रही हैं। ऐसे में सिर्फ 'पापड़ बनाने की शरारत' कहकर इतने बड़े मामले को खारिज नहीं किया जा सकता।
छात्राओं के भविष्य से खिलवाड़ बंद करे प्रशासन
स्वराज पोस्ट की पड़ताल से साफ है कि कस्तूरबा गांधी छात्रावास के भीतर अंदरूनी गुटबाजी का जाल फैला हुआ है। स्टाफ की आपसी लड़ाई में व्यवस्था को बदनाम करने और बच्चियों के खान-पान के साथ खिलवाड़ करने का खेल जारी है। शिक्षा मंत्री के जांच के आदेश के बाद अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासनिक स्तर पर कड़ा रुख अपनाते हुए इस गुटबाजी को खत्म किया जाए, ताकि छात्रावास का माहौल सुधरे और छात्राओं का भविष्य व स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट










