DM की सख्ती लाई रंग, 6 हफ्तों में 733 गंभीर मरीजों का त्वरित इलाज, स्वास्थ्य सुविधाओं में बड़ा सुधार
गोपालगंज जिला प्रशासन की कड़ाई और नियमित समीक्षा का असर अब सदर अस्पताल, गोपालगंज में साफ दिखने लगा है। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 07 जुलाई 2026 से 18 अगस्त 2026 तक आपातकालीन वार्ड में कुल 733 गंभीर मरीजों को भर्ती किया गया।

गोपालगंज जिला प्रशासन की कड़ाई और नियमित समीक्षा का असर अब सदर अस्पताल, गोपालगंज में साफ दिखने लगा है। जिला पदाधिकारी समीर सौरभ के कड़े निर्देशों के बाद अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं, मरीजों के इलाज और एंबुलेंस व्यवस्था को पहले से अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया गया है। प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 07 जुलाई 2026 से 18 अगस्त 2026 तक (छह सप्ताह) के भीतर आपातकालीन वार्ड में कुल 733 गंभीर मरीजों को भर्ती कर त्वरित डॉक्टरी सहायता दी गई।
आंकड़ों पर एक नजर:
पिछले एक सप्ताह 12 से 18 अगस्त 2026 के दौरान रिकॉर्ड 181 गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जो छह हफ्तों में सबसे अधिक है।
इलाज व डिस्चार्ज:
आपातकालीन वार्ड में त्वरित प्राथमिक उपचार के बाद 837 मरीजों को डिस्चार्ज किया गया। वहीं सामान्य व विशेष वार्डों में 803 नए मरीजों को भर्ती किया गया और 891 मरीजों को स्वस्थ होने के बाद छुट्टी दी गई।
एंबुलेंस व सुरक्षित रेफरल:
34 अत्यंत गंभीर मरीजों को बेहतर और सुरक्षित एंबुलेंस समन्वय के साथ समय पर उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया।
किन कारणों से करना पड़ता है रेफर?
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक मरीजों को उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर करने के मुख्य कारणों में बेहोशी मल्टीपल फ्रैक्चर, सड़क दुर्घटनाएं और गंभीर शारीरिक आघात शामिल हैं। मरीज की हालत और परिजनों के अनुरोध को ध्यान में रखते हुए नियमों के तहत ही रेफरल प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
जिलाधिकारी के कड़े निर्देश:
DM समीर सौरभ ने अस्पताल प्रबंधन को सख्त निर्देश दिए हैं कि गंभीर मरीजों के इलाज में 1 सेकंड की भी देरी न हो। रोस्टर के अनुसार डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की 24 घंटे मौजूदगी सुनिश्चित की जाए।
अस्पताल की साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता और जांच सुविधाओं की नियमित मॉनिटरिंग हो। जिला प्रशासन का मुख्य उद्देश्य सदर अस्पताल में आने वाले हर मरीज को समयबद्ध, पारदर्शी और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट











