सारण की बाढ़ में सियासत गरम, पप्पू यादव ने सरकार पर साधा निशाना, चुनाव में हेलीकॉप्टर, अभी नेता कहां?
सारण से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के मकेर इलाके में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने राहत व्यवस्था को लेकर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला है।

सारण से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के मकेर इलाके में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने राहत व्यवस्था को लेकर सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर तीखा हमला बोला है। कई दिनों से बाढ़ की मार झेल रहे लोगों के बीच पहुंचे पप्पू यादव ने सिर्फ हालात का जायजा ही नहीं लिया, बल्कि बाढ़ पीड़ितों से सीधे बातचीत कर यह जानने की कोशिश की कि उन्हें प्रशासन की तरफ से क्या मदद मिल रही है।
इसी दौरान पप्पू यादव ने एक ऐसा बयान दे दिया, जिसको लेकर अब राजनीतिक चर्चा तेज हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब असम में बाढ़ आती है तो देश के बड़े नेता और उद्योगपति मदद के लिए आगे आते हैं, लेकिन बिहार की बाढ़ को देखने और यहां के लोगों की मदद करने के लिए वैसी पहल क्यों नहीं दिखाई देती।
पप्पू यादव ने अपने बयान में अडानी और अंबानी का नाम भी लिया। उनका कहना था कि दूसरे राज्यों में आपदा के समय बड़े स्तर पर मदद दिखाई देती है, लेकिन बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों को भी उसी तरह की मदद की जरूरत है। चुनाव के समय हेलीकॉप्टर, बाढ़ में नेता कहां? पप्पू यादव ने स्थानीय नेताओं की मौजूदगी को लेकर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर अभी चुनाव होता तो इलाके में 10-12 हेलीकॉप्टर दिखाई देते।यानी पप्पू यादव का निशाना साफ तौर पर इस बात पर था कि चुनाव के समय जनता के बीच पहुंचने वाले नेता आपदा के समय कितने सक्रिय नजर आते हैं। बाढ़ के बीच यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रभावित परिवारों को इस समय राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि राहत, भोजन, दवा और सुरक्षित जगह की जरूरत है।
राहत व्यवस्था पर भी गंभीर आरोप
पप्पू यादव ने बाढ़ राहत के पैसे को लेकर भी बंदरबांट का आरोप लगाया। हालांकि यहां यह साफ करना जरूरी है कि यह पप्पू यादव का आरोप है और उन्होंने मौके पर इसके समर्थन में कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं किया। ऐसे में अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन या सरकार की तरफ से इन आरोपों पर क्या जवाब सामने आता है। तीन रुपये के पारले-जी ने खींचा ध्यान पप्पू यादव के दौरे के दौरान एक बाढ़ प्रभावित युवक ने उन्हें बताया कि राहत के नाम पर उसे तीन रुपये वाला पारले-जी मिल रहा है।
युवक की बात सुनकर पप्पू यादव ने तंज करते हुए कहा-जब सारा पैसा चुनाव लड़ने में लग गया, तो पारले-जी ही मिलेगा।”यह टिप्पणी मौके पर मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई। बाढ़ पीड़ितों की असली परेशानी क्या है? लेकिन इन राजनीतिक बयानों से अलग अगर जमीन पर लोगों की स्थिति देखें, तो सवाल बेहद सीधा है। बाढ़ से प्रभावित परिवारों को खाने-पीने की चीजें चाहिए। बीमार लोगों के लिए दवा चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों के लिए सुरक्षित जगह चाहिए और सबसे जरूरी-समय पर राहत चाहिए।
सारण के कई इलाकों में बाढ़ का असर बना हुआ है और ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं हर प्रभावित परिवार तक कैसे पहुंचाई जाएं। अब सरकार के सामने दोहरी चुनौती, एक तरफ बाढ़ की स्थिति से निपटना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, तो दूसरी तरफ पप्पू यादव के आरोपों ने राहत व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी खड़ी कर दी है।
अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या जवाब देती है और क्या आने वाले दिनों में बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत व्यवस्था और मजबूत होती है। क्योंकि बाढ़ के पानी के बीच फंसे लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल राजनीति नहीं है। उनका सवाल है—राहत कब पहुंचेगी? और यही सवाल इस वक्त सारण की बाढ़ के बीच सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
छपरा से यशवंत कुमार सिंह की रिपोर्ट











