पट खुलते माई मुसुकइली, जयकारों से गूंज उठे पूजा पंडाल
'पट खुलते माई मुसुकइली' भोजपुरी गीत की यह पंक्ति शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा के पट खुलने के साथ ही साकार होती नजर आई। मां के मनमोहक स्वरूप के दर्शन होते ही श्रद्धालुओं के चेहरे खिल उठे।

कोईलवर : 'पट खुलते माई मुसुकइली' भोजपुरी गीत की यह पंक्ति शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि पर मां दुर्गा के पट खुलने के साथ ही साकार होती नजर आई। मां के मनमोहक स्वरूप के दर्शन होते ही श्रद्धालुओं के चेहरे खिल उठे। माता के जयकारों और घंट-घड़ियाल की गूंज से पूजा पंडालों का माहौल भक्तिमय हो गया। मां दुर्गा की एक झलक पाने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
सप्तमी तिथि पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद मां दुर्गा के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए
आपको बता दें कि सप्तमी तिथि पर विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना के बाद मां दुर्गा के पट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए गए। पट खुलते ही पंडालों में मौजूद भक्तों ने माता रानी के जयकारे लगाए और सुख-समृद्धि, शांति और परिवार की खुशहाली की कामना की। आकर्षक सजावट, रंग-बिरंगी रोशनी और मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
शाम होते ही पूजा पंडालों में दर्शन के लिए लोगों की भीड़ बढ़ने लगी
वहीं शाम होते ही पूजा पंडालों में दर्शन के लिए लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पूरे उत्साह के साथ मां के दर्शन करने पहुंचे। वातावरण में गूंजते भक्ति गीतों और जयकारों ने पूरे क्षेत्र को दुर्गामय बना दिया। मां के पट खुलने के साथ ही नवरात्र की रौनक और बढ़ गई व श्रद्धालुओं में अष्टमी और नवमी की पूजा को लेकर भी उत्साह देखने को मिला। इस दौरान कोईलवर के आजाद कला मंदिर, जनता ड्रामेटिक असोसिएशन, सरस्वती कला केंद्र और नवोदय दुर्गा पूजा समिति पर भी भारी भीड़ जुटी रही।
आरा से दीपक गुप्ता की रिपोर्ट













