मानसून सत्र में हंगामे के आसार, संसद में पेश होंगे 7 अहम विधेयक

संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है और इस बार राजनीतिक हलकों में इसकी खास चर्चा है। इसकी वजह केंद्र सरकार का विधायी एजेंडा और कई अहम मुद्दों पर संभावित बहस है। हालांकि लंबे समय से जिन प्रस्तावित विधेयकों; जैसे परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, वे फिलहाल सरकार की घोषित सूची में शामिल नहीं हैं।
सरकार ने संकेत दिया है कि इस सत्र में सात महत्वपूर्ण विधेयक संसद के समक्ष पेश किए जाएंगे। इनमें विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025, आयकर (संशोधन) विधेयक-2026, सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संशोधन विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक-2026, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक तथा एमएसएमई विकास (संशोधन) विधेयक-2026 शामिल हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जिन दो प्रस्तावित विधेयकों; परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा चल रही थी, उनका उल्लेख सरकार की इस सूची में नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री को पद से हटाने के प्रस्ताव से जुड़े चर्चित 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी अटकलें थीं, लेकिन यह भी फिलहाल सूची से बाहर है।
करीब 19 दिनों तक चलने वाला मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 7 अगस्त तक प्रस्तावित है। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर इसकी अवधि बढ़ाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
इस बार सदन की कार्यवाही के दौरान तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिल सकती है। विपक्ष कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोलने की तैयारी में है। अयोध्या राम मंदिर में कथित चंदा चोरी का मामला, विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, ई-20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवाल, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक का विरोध तथा एसआईआर से जुड़े विवाद ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सदन में जोरदार बहस और हंगामे के आसार बताए जा रहे हैं। ऐसे में आगामी मानसून सत्र के दौरान विधायी कार्यवाही के साथ-साथ राजनीतिक टकराव भी केंद्र में रहने की संभावना है।













