कश्मीर-लद्दाख के बीच सालभर कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार, जोजिला सुरंग में आज होगा अंतिम ब्रेकथ्रू ब्लास्ट
कश्मीर-लद्दाख के बीच सालभर कनेक्टिविटी का सपना होगा साकार, जोजिला सुरंग में आज होगा अंतिम ब्रेकथ्रू ब्लास्ट
भारत की सबसे महत्वाकांक्षी पर्वतीय आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल जोजिला सुरंग मंगलवार को एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश करने जा रही है। करीब पांच वर्षों से जारी निर्माण कार्य के बाद सुरंग में अंतिम ब्रेकथ्रू ब्लास्ट किया जाएगा, जो इसकी खुदाई पूरी होने का संकेत होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी कारगिल स्थित पूर्वी पोर्टल पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर इस उपलब्धि के साक्षी बनेंगे।
करीब 13.15 किलोमीटर लंबी यह सुरंग समुद्र तल से 11,600 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में बनाई जा रही है। परियोजना पूरी होने के बाद श्रीनगर-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को हर मौसम में चालू रखने का लक्ष्य पूरा होगा। वर्तमान में भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में यह मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, जिससे लद्दाख का देश के अन्य हिस्सों से संपर्क प्रभावित होता है।
जोजिला दर्रे के नीचे निर्मित की जा रही यह सुरंग ऊंचाई वाले कठिन और जोखिमपूर्ण मार्ग का विकल्प बनेगी। इसके शुरू होने के बाद कश्मीर और लद्दाख के बीच आवागमन अधिक सुरक्षित, तेज और निर्बाध हो जाएगा। यात्रा समय में भी बड़ा बदलाव आएगा। जहां अभी जोजिला दर्रा पार करने में लगभग तीन घंटे लगते हैं, वहीं सुरंग के चालू होने पर यह दूरी करीब आधे घंटे में तय की जा सकेगी।
यह परियोजना केवल नागरिक यातायात तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। लद्दाख क्षेत्र चीन और पाकिस्तान से लगती संवेदनशील सीमाओं के निकट स्थित है। ऐसे में हर मौसम में उपलब्ध सड़क संपर्क सेना की त्वरित तैनाती, रसद आपूर्ति और परिचालन क्षमता को मजबूत करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता दिए जाने के पीछे सामरिक जरूरतें भी एक प्रमुख कारण रही हैं। जोजिला सुरंग इस दिशा में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखी जा रही है।
कठिन हिमालयी परिस्थितियों में हुआ निर्माण
हैदराबाद की मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MEIL) इस परियोजना का निर्माण कर रही है। सुरंग निर्माण के लिए न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (NATM) का उपयोग किया गया, जिसे जटिल भूगर्भीय और पहाड़ी परिस्थितियों में प्रभावी तकनीक माना जाता है।
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, परियोजना के दौरान इंजीनियरों और श्रमिकों को अत्यंत चुनौतीपूर्ण मौसम का सामना करना पड़ा। कई महीनों तक तापमान शून्य से 30 डिग्री सेल्सियस नीचे पहुंच जाता था, फिर भी 1,200 से अधिक कर्मियों ने लगातार काम जारी रखा।
निर्माण अवधि के दौरान क्षेत्र में कई बार भारी बर्फबारी और हिमस्खलन की घटनाएं हुईं, जिससे उपकरणों और कार्यस्थलों को नुकसान पहुंचा। जनवरी 2023 में एक बड़े हिमस्खलन के दौरान भारतीय सेना ने 170 से अधिक श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला था। इन चुनौतियों के बावजूद परियोजना निर्धारित लक्ष्य की ओर बढ़ती रही।
लद्दाख की सांसद हनीफा जान ने इस उपलब्धि को क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा कि दशकों से लोग इस सुरंग की मांग कर रहे थे और अब इसके वास्तविक रूप लेने से स्थानीय आबादी में उत्साह का माहौल है। उनके अनुसार, यह परियोजना न केवल परिवहन सुविधाओं को बेहतर बनाएगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगी।
अंतिम चरण में पहुंची परियोजना
सुरंग की खुदाई पूरी होने के बाद अब परियोजना फिनिशिंग और अन्य तकनीकी कार्यों के चरण में प्रवेश करेगी। इसके पूर्ण होने पर कश्मीर और लद्दाख के बीच चौबीसों घंटे और सालभर सड़क संपर्क उपलब्ध होगा। इससे क्षेत्रीय विकास, आर्थिक एकीकरण और राष्ट्रीय सुरक्षा; तीनों मोर्चों पर दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।