CM ने खोला बातचीत का दरवाजा, लेकिन छात्रों के दो गुटों ने बढ़ाई उलझन

JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है। शुक्रवार को उन्होंने कहा कि छात्रों को अपनी समस्याएं और सुझाव सरकार तक पहुंचाने के लिए सभी आवश्यक मंच उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार उनकी चिंताओं को समझना चाहती है और बातचीत के लिए तैयार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार छात्रों की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करना चाहती है। उन्होंने छात्रों से सरकार को सुझाव देने की अपील करते हुए कहा कि युवाओं की जरूरतों और भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था में जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य छात्रों की चिंताओं को दूर करने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
दरअसल, JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में धरने पर बैठे हैं। आंदोलनकारी परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। छात्रों से बातचीत के लिए राज्य सरकार पहले ही मंत्रियों और अधिकारियों की एक समिति गठित कर चुकी है।
हालांकि, वार्ता शुरू कराने में प्रतिनिधिमंडल को लेकर पेंच फंस गया है। आंदोलनकारी छात्रों के एक समूह ने गुरुवार को सरकार के समक्ष 13 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का प्रस्ताव रखा था। इसमें पूर्ववर्ती रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में महाधिवक्ता रह चुके अजित कुमार का नाम भी शामिल है। प्रतिनिधिमंडल को लेकर सहमति नहीं बनने के कारण सरकार और छात्रों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।
अब शुक्रवार को आंदोलन से जुड़े दूसरे गुट ने भी अपने सात प्रतिनिधियों के नाम घोषित कर दिए हैं। इस तरह छात्रों की ओर से सरकार से संवाद के लिए दो अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल सामने आ गए हैं। इससे वार्ता की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार आंदोलनकारी छात्रों के किस प्रतिनिधिमंडल के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करती है। मुख्यमंत्री के बातचीत के लिए तैयार होने के संकेत के बीच प्रतिनिधिमंडल को लेकर बनी स्थिति का समाधान वार्ता की दिशा तय करने में अहम होगा।





















