बरसों बाद लौटी मुस्कान! परिवार के सामने 16 माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण

झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को मंगलवार को बड़ी सफलता मिली। राज्य पुलिस मुख्यालय में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 16 सक्रिय माओवादियों ने पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। आत्मसमर्पण समारोह में उनके परिजनों को भी आमंत्रित किया गया, जिन्होंने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे परिवार और समाज के लिए नई शुरुआत बताया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी लंबे समय से राज्य के विभिन्न इलाकों में सक्रिय थे और इनमें कई इनामी उग्रवादी भी शामिल हैं। इन पर घोषित इनाम की कुल राशि ₹39 लाख से ₹60 लाख के बीच है। इनमें ₹15 लाख के इनामी रीजनल कमांडर संतोष उर्फ गांधी का नाम भी प्रमुख है।
आत्मसमर्पण करने वालों में संगठन के विभिन्न स्तरों के सदस्य शामिल हैं। इनमें एक रीजनल कमांडर, तीन जोनल कमांडर, तीन सब-जोनल कमांडर, छह एरिया कमांडर और तीन अन्य कैडर सदस्य शामिल हैं। ये सभी पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, रांची, गिरिडीह, बोकारो और लातेहार समेत कई जिलों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
पुलिस को सौंपे आधुनिक हथियार
आत्मसमर्पण के साथ इन माओवादियों ने अपने पास मौजूद हथियार और गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों को सौंप दिए। पुलिस को इंसास और एके-47 राइफल सहित 11 आधुनिक हथियार, 38 मैगजीन और 1,562 कारतूस प्राप्त हुए हैं। इसे सुरक्षा एजेंसियां उग्रवाद विरोधी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रही हैं।
समारोह में मौजूद परिजनों ने कहा कि उनके लिए यह दिन बेहद खुशी का है। उनका मानना है कि अब परिवार के सदस्य सामान्य जीवन जी सकेंगे और समाज में सम्मान के साथ अपनी पहचान बना पाएंगे। उन्होंने बताया कि पहले नक्सली होने की वजह से सामाजिक उपेक्षा और भेदभाव का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नए जीवन की शुरुआत का अवसर मिला है।
झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटने वाले उग्रवादियों को समाज में पुनर्स्थापित करने की दिशा में सहायता प्रदान की जाती है। पुलिस का मानना है कि इस तरह के आत्मसमर्पण राज्य में उग्रवाद को कमजोर करने और प्रभावित क्षेत्रों में शांति बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे।











