JSSC-CGL पर सरकार के फैसले से उबाल, नियुक्त कर्मियों ने खोला मोर्चा

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद नियुक्ति पा चुके अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई। सोमवार शाम राजधानी रांची के प्रोजेक्ट भवन के बाहर सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों ने पहले मानव श्रृंखला बनाकर विरोध दर्ज कराया। बाद में सचिवालय के बाहर उनका प्रदर्शन हंगामे में बदल गया।
प्रदर्शन कर रहे कर्मियों का कहना है कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के बाद अपनी जिम्मेदारी संभाली है और अब तक पूरी ईमानदारी के साथ सरकारी सेवा कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।
सहायक प्रशाखा पदाधिकारियों ने कहा कि वे किसी भी निष्पक्ष जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। उनका तर्क है कि यदि कुछ लोगों ने गड़बड़ी की है तो उसका खामियाजा पूरी चयन प्रक्रिया में सफल हुए अभ्यर्थियों को नहीं भुगतना चाहिए। कर्मियों के मुताबिक, कई अभ्यर्थियों ने वर्षों की तैयारी और मेहनत के बाद परीक्षा में सफलता हासिल की और नियुक्ति पाई है। पूरी परीक्षा निरस्त होने की स्थिति में ऐसे अभ्यर्थियों के सामने दोबारा नौकरी हासिल करने की अनिश्चितता खड़ी हो जाएगी।
सरकार से सेवा सुरक्षा की मांग
मुख्यमंत्री की ओर से परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद इन कर्मचारियों ने सरकार से अपनी सेवा सुरक्षित रखने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा नियुक्तियों पर किसी तरह का फैसला लेने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने यह भी आशंका जताई कि यदि पूरी भर्ती प्रक्रिया समाप्त कर दी जाती है, तो इसका असर सिर्फ कर्मचारियों के भविष्य पर ही नहीं, बल्कि सरकारी विभागों के कामकाज पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सरकार के फैसले के बाद नियुक्त कर्मियों का विरोध और तेज होने के संकेत हैं।











