भक्ति, बाजार और मनोरंजन... जगन्नाथपुर मेले में दिखेगी झारखंडी संस्कृति की झलक
भक्ति, बाजार और मनोरंजन... जगन्नाथपुर मेले में दिखेगी झारखंडी संस्कृति की झलक
रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में गुरुवार से शुरू हुए विश्वप्रसिद्ध रथयात्रा महापर्व ने पूरे शहर को भक्तिमय माहौल में रंग दिया है। भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब मंदिर परिसर में उमड़ पड़ा। रथयात्रा के साथ आरंभ हुआ जगन्नाथपुर मेला धार्मिक आस्था के साथ-साथ झारखंड की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक बाजार और स्थानीय व्यापार का भी बड़ा केंद्र बन गया है।\
मंदिर परिसर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमाओं को रथ पर विराजमान करने की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। रथारोहण से पहले आयोजित सहस्त्र नाम पूजा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरे वातावरण में मंत्रोच्चार तथा भजन-कीर्तन की गूंज सुनाई दी। भक्त उस क्षण का इंतजार कर रहे हैं जब भगवान गर्भगृह से बाहर आकर भव्य रथ पर विराजमान होंगे और नगर भ्रमण के लिए निकलेंगे।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) की ओर से भी सहायता शिविर लगाया गया है, जहां श्रद्धालुओं को आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।
मनोरंजन से गुलजार हुआ मेला परिसर
धार्मिक आयोजन के साथ मेले में मनोरंजन की भी भरपूर व्यवस्था है। विशाल झूले, विभिन्न खेल और रोमांचक आकर्षण बच्चों तथा युवाओं को खासा लुभा रहे हैं। वहीं, जादूगरों और करतब दिखाने वाले कलाकारों के प्रदर्शन लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। ‘मौत का कुआं’ जैसे पारंपरिक आकर्षण भी मेले में आने वालों के बीच खास उत्साह का केंद्र बने हुए हैं।
जगन्नाथपुर मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्थानीय हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों का भी बड़ा बाजार बन चुका है। रसोई में उपयोग होने वाले घरेलू सामान से लेकर खेती और ग्रामीण जीवन से जुड़े पारंपरिक औजार जैसे कुदाल, टांगी, फरसा, बेलन और चकला तक यहां बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यापारियों के स्टॉलों पर खरीदारों की अच्छी भीड़ देखने को मिल रही है।
मेले में झारखंड की लोक संस्कृति भी पूरे रंग में दिखाई दे रही है। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज पूरे परिसर को उत्सवी माहौल से भर रही है और आगंतुकों को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ रही है।
मेले में खाने-पीने के स्टॉल भी लोगों की पसंद का प्रमुख केंद्र बने हुए हैं। विशेष रूप से प्रसिद्ध बालूसाही, ताजा जलेबी और स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मिठाइयों और पारंपरिक पकवानों की खुशबू पूरे मेले के माहौल को और भी जीवंत बना रही है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला बड़ा सहारा
जगन्नाथपुर रथ मेला धार्मिक महत्व के साथ-साथ आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक यहां पहुंचते हैं, जिससे स्थानीय दुकानदारों, कारीगरों और छोटे व्यवसायियों को बेहतर कारोबार का अवसर मिलता है। साथ ही लोक कलाकारों को अपनी कला और संस्कृति प्रदर्शित करने का मंच भी मिलता है।
आने वाले कई दिनों तक चलने वाला यह मेला रांची की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक जीवन का प्रमुख आकर्षण बना रहेगा। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से सतर्क रहने और अपने सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की अपील की है, ताकि सभी लोग सुरक्षित माहौल में इस भव्य आयोजन का आनंद ले सकें।
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