मां के संघर्ष को सलाम, नौकरी के लिए नंगे पांव साड़ी में 1600 मीटर दौड़ी
झारखंड के रामगढ़ जिले की दुलमी प्रखंड की सोसो गावं की रहने वाली कविता महतो का नाम उनके अदम्य साहस, संघर्ष और बुलंद हौसले के कारण एक प्रेरणा बन चुका है। अपनी बेटी के साथ मैदान में उतरी कविता महतो।

झारखंड के रामगढ़ जिले की दुलमी प्रखंड की सोसो गावं की रहने वाली कविता महतो का नाम उनके अदम्य साहस, संघर्ष और बुलंद हौसले के कारण एक प्रेरणा बन चुका है। अपनी बेटी के साथ मैदान में उतरी कविता महतो।
रामगढ़ में होमगार्ड बहाली के ट्रायल के दौरान कविता महतो अपनी बेटी के साथ मैदान में उतरी थीं। जब वे दौड़ लगा रही थीं, तो उनकी बेटी लगातार उनका हौसला बढ़ा रही थी। मां-बेटी के इस आपसी समर्थन ने यह साबित कर दिया कि एक मां अपने बच्चों के भविष्य के लिए किस हद तक संघर्ष कर सकती है और कैसे बच्चों का साथ बड़े से बड़े पहाड़ जैसी मुश्किलों को भी आसान बना देता है।
होमगार्ड के पदों के लिए आयोजित ट्रायल में कविता ने पैरों में जूते न होने के बावजूद पारंपरिक साड़ी पहनकर और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ में हिस्सा लिया। इस 1600 मीटर की दौड़ को पूरा करने के लिए 10 मिनट का समय निर्धारित था, लेकिन कविता ने अपने मजबूत इरादों के दम पर यह दूरी मात्र 6 मिनट में ही पूरी कर सबको हैरान कर दिया।
अनूप नारायण सिंह













