कोडरमा घाटी में 15 घंटे का महाजाम: रांची-पटना मार्ग पर थमा रहा चक्का, रात भर परेशान रहे यात्री
कोडरमा: रांची-पटना मुख्य मार्ग (NH-20) की लाइफलाइन कही जाने वाली व्यस्त कोडरमा घाटी में रविवार शाम से लेकर सोमवार सुबह तक भीषण जाम लगा रहा। करीब 15 घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहने से घाटी के दोनों ओर 25 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं।

कोडरमा: रांची-पटना मुख्य मार्ग (NH-20) की लाइफलाइन कही जाने वाली व्यस्त कोडरमा घाटी में रविवार शाम से लेकर सोमवार सुबह तक भीषण जाम लगा रहा। करीब 15 घंटे तक यातायात पूरी तरह ठप रहने से घाटी के दोनों ओर 25 किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लग गईं।
इस दौरान हजारों यात्री, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, रात भर भूखे-प्यासे सड़क पर फंसे रहे। हैरानी की बात यह है कि इस विकट स्थिति के दौरान नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी मौके पर सुध लेने तक नहीं पहुंचा, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों में भारी आक्रोश देखा गया।
कैसे हुई जाम की शुरुआत?
मिली जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 9 बजे 'नवां माइल' घाटी के पास एक टेलर और ट्रक के ब्रेकडाउन (खराब होने) से समस्या की शुरुआत हुई थी। स्थानीय लोगों और पुलिस के सहयोग से उसे जैसे-तैसे हटाया गया, लेकिन शाम करीब 4 बजे 'जमसोती नाला' के पास एक अन्य ट्रक का टायर फटने से वह बीच सड़क पर ही फंस गया।
घाटी की खस्ताहाल सड़क और सड़क के दोनों किनारों पर बने गहरे गड्ढों के कारण स्थिति तेजी से बिगड़ गई। ट्रक के फंसते ही ओवरटेकिंग के चक्कर में दोनों ओर से वाहन आमने-सामने आ गए, जिससे आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
खस्ताहाल सड़कें और NHAI की उदासीनता
कोडरमा घाटी रांची-पटना मार्ग का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील हिस्सा है, जहां से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। बावजूद इसके, सड़क की हालत बेहद दयनीय है। जगह-जगह बने बड़े-बड़े गड्ढे और टूटी हुई सड़कें आए दिन वाहन चालकों के लिए मुसीबत बन रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि NHAI द्वारा न तो समय पर सड़कों की मरम्मत कराई जा रही है और न ही घाटी में वाहन खराब होने पर त्वरित कार्रवाई के लिए क्रेन या रिकवरी वैन की कोई स्थायी व्यवस्था की गई है। एक छोटी सी तकनीकी खराबी भी पूरी घाटी को घंटों जाम में जकड़ देती है।
रूट बदलना पड़ा, रात भर परेशान रहे यात्री
लंबी जाम के कारण बिहार से रांची की ओर जाने वाले कई भारी और छोटे वाहनों को मजबूरी में अपना रूट बदलकर पटना-गया-बरही के रास्ते भेजना पड़ा। वहीं, जो वाहन पहले से घाटी में फंस चुके थे, उनके चालकों और यात्रियों को पूरी रात खुले आसमान के नीचे सड़क पर गुजारनी पड़ी। कड़ाके की ठंड और भूख-प्यास से जूझ रहे यात्रियों की सुधि लेने वाला कोई प्रशासनिक या NHAI का अधिकारी मौके पर मौजूद नहीं था।
थाना प्रभारी की मुस्तैदी से मिली राहत
संकट की इस घड़ी में कोडरमा थाना प्रभारी अरविंद कुमार देवदूत बनकर सामने आए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वे भारी पुलिस बल के साथ पूरी रात घाटी में ही डटे रहे। उनकी देखरेख में क्रेन मंगवाकर खराब वाहनों को हटवाया गया। इसके साथ ही, रात में फंसे हुए भूखे-प्यासे यात्रियों के बीच पानी और अन्य जरूरी चीजों की व्यवस्था कराई गई, जिससे लोगों को काफी राहत मिली।
प्रशासन की कड़ी मशक्कत और लगातार प्रयासों के बाद सोमवार सुबह करीब 7 बजे जाकर यातायात को पूरी तरह सामान्य किया जा सका, तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
रांची से सुजीत कुमार की रिपोर्ट











