तीसरी सोमवारी पर बाबा देवलेश्वर धाम में उमड़ी रिकॉर्ड भीड़, शिवभक्ति में डूबे श्रद्धालु

श्रावण मास की तीसरी सोमवारी पर जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड स्थित देवली गांव का प्रसिद्ध बाबा देवलेश्वर धाम शिवभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा। देर रात से ही श्रद्धालुओं का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया था और सुबह होते-होते पूरा मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया। चारों ओर "हर-हर महादेव" और "बोल बम" के जयघोष से वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो उठा।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, रविवार रात लगभग साढ़े 11 बजे से ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे रात बीतती गई, श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती रही। सोमवार तड़के चार बजे से जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें लग गईं। बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का अभिषेक कर परिवार की खुशहाली, उत्तम स्वास्थ्य, रोजगार, व्यवसाय में सफलता और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की।
मंदिर के मुख्य पुजारी ने बताया कि वर्षों से श्रावण मास में भक्तों की भीड़ देखी जाती रही है, लेकिन इस बार तीसरी सोमवारी पर उमड़ी श्रद्धालुओं की संख्या अब तक की सबसे अधिक रही। उनके अनुसार, अपने लंबे अनुभव में उन्होंने पहली बार इतनी विशाल भीड़ मंदिर में देखी है।
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रबंधन समिति ने पहले से व्यापक तैयारियां की थीं। दर्शन और जलाभिषेक के लिए अलग-अलग मार्ग बनाए गए थे। बैरिकेडिंग, पेयजल की व्यवस्था और स्वयंसेवकों की तैनाती के कारण भीड़ के बावजूद व्यवस्थाएं सुचारु बनी रहीं। मंदिर पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रबंधन की तैयारियों की सराहना करते हुए संतोष जताया।
सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी नाला थाना पुलिस ने संभाली। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी। पुलिसकर्मी पूरे दिन भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित बनाए रखने में सक्रिय रहे। प्रशासन और मंदिर समिति के समन्वय से पूरे आयोजन के दौरान शांति और अनुशासन कायम रहा।
दिनभर मंदिर परिसर में शिवभक्ति का विशेष वातावरण बना रहा। केसरिया वस्त्र धारण किए और हाथों में जल लिए श्रद्धालु लगातार बाबा देवलेश्वर के दर्शन के लिए पहुंचते रहे। शाम तक भी भक्तों का तांता लगा रहा। मंदिर समिति का कहना है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड उपस्थिति भगवान शिव के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। तीसरी सोमवारी का यह आयोजन बाबा देवलेश्वर धाम के लिए ऐतिहासिक और यादगार अवसर के रूप में दर्ज हो गया।













