माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र के लिए सीआइएमपी ने शुरू किया अपनी तरह का पहला आवासीय कार्यक्रम
देश में तेजी से विस्तार कर रहे माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र की क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना ने 15-दिवसीय आवासीय प्रमाणन कार्यक्रम का शुभारंभ किया है।

देश में तेजी से विस्तार कर रहे माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र की क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना ने बिजनेस इन्क्यूबेशन एंड इनोवेशन फाउंडेशन ने माइक्रोफाइनेंस पेशेवरों के लिए "बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएँ एवं बीमा) पर 15-दिवसीय आवासीय प्रमाणन कार्यक्रम का शुभारंभ किया है। 04 अगस्त 2026 से प्रारंभ होने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों को समकालीन ज्ञान, नियामकीय समझ, नैतिक कार्यप्रणालियों तथा प्रभावी एवं उत्तरदायी माइक्रोफाइनेंस संचालन के लिए आवश्यक प्रबंधकीय कौशल से सुसज्जित करना है। इस प्रथम बैच में देश की अग्रणी माइक्रोफाइनेंस संस्था अन्नपूर्णा फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड के 47 प्रतिभागी प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।
यह आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम माइक्रोफाइनेंस के विकासक्रम, विभिन्न माइक्रोफाइनेंस मॉडलों एवं उनके तुलनात्मक लाभ, स्वयं सहायता समूह एवं संयुक्त दायित्व समूह ऋण मॉडल, वित्तीय समावेशन, एनबीएफसी-एमएफआई के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक के नियामकीय प्रावधान, नियामकीय अनुपालन, वित्तीय विवरणों का विश्लेषण, ग्राहक संरक्षण, फेयर प्रैक्टिसेज़ कोड, उत्तरदायी ऋण वितरण, अतिऋणग्रस्तता की रोकथाम तथा व्यावसायिक नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को समाहित करता है। इसके अतिरिक्त प्रतिभागियों को निर्णय लेने की क्षमता, प्रभावी संचार एवं प्रस्तुतीकरण कौशल, तनाव एवं समय प्रबंधन तथा माइक्रोफाइनेंस संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बुनियादी उपयोग का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।
इस अवसर पर सीआईएमपी के निदेशक प्रो. राणा सिंह ने कहा कि आज बिहार देश का सबसे बड़ा माइक्रोफाइनेंस बाज़ार है, जहाँ लगभग 60,000 करोड़ रुपये का बकाया ऋण पोर्टफोलियो है। जैसे-जैसे यह क्षेत्र विस्तार कर रहा है, वैसे-वैसे ऐसे प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता बढ़ रही है, जिनमें तकनीकी दक्षता के साथ नैतिक मूल्यों और ग्राहक-केंद्रित कार्यसंस्कृति का समावेश हो। यह कार्यक्रम समावेशी वित्त और सतत आर्थिक विकास को गति देने में सक्षम कुशल मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में सीआईएमपी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हमें विश्वास है कि ऐसे विशेषीकृत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं के लिए बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं एवं बीमा (BFSI) क्षेत्र में उत्कृष्ट करियर के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
इस अवसर पर सीआईएमपी-बीआईआईएफ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कुमोद कुमार ने कहा कि यह 15-दिवसीय आवासीय बीएफएसआई प्रमाणन कार्यक्रम वित्तीय समावेशन के क्षेत्र के लिए एक कुशल, सक्षम एवं भविष्य के अनुरूप कार्यबल तैयार करने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। शैक्षणिक उत्कृष्टता और उद्योग जगत की विशेषज्ञता के समन्वय के माध्यम से हमारा उद्देश्य ऐसा प्रभावी शिक्षण अनुभव प्रदान करना है, जो प्रतिभागियों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ संस्थागत प्रभावशीलता को भी सुदृढ़ करे।
सीआईएमपी के एसोसिएट डीन एवं नाबार्ड के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की विषय-वस्तु को माइक्रोफाइनेंस संस्थान की एक शाखा के क्षेत्रीय भ्रमण तथा प्रशिक्षण आवश्यकताओं के विस्तृत आकलन के आधार पर सावधानीपूर्वक तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में तकनीकी विषयों के साथ-साथ व्यक्तित्व विकास एवं सॉफ्ट स्किल्स से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों को भी शामिल किया गया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण करने के बाद प्रतिभागी उत्तरदायी ऋण वितरण के सभी नैतिक मानकों एवं सिद्धांतों का पालन करते हुए माइक्रोफाइनेंस संचालन की जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करने में पूर्णतः सक्षम होंगे।
यह कार्यक्रम बिहार में कार्यरत माइक्रोफाइनेंस संस्थानों के क्षमता निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध होगा तथा बीएफएसआई क्षेत्र के लिए प्रशिक्षित एवं दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस पहल के माध्यम से सीआईएमपी वित्तीय समावेशन, उत्तरदायी वित्तीय सेवाओं तथा मानव संसाधन विकास को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ कर रहा है। देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे माइक्रोफाइनेंस बाज़ारों में शामिल बिहार में यह कार्यक्रम समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।













