17 महीने से मुआवजे का इंतजार, आठवीं बार टूटा BCCL का वादा
बोकारो के दुग्दा थाना क्षेत्र में सिजुआ भूमि अधिग्रहण प्रभावित विस्थापितों ने मुआवजा और जमीन की रजिस्ट्री की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। 17 महीनों से कोयला निकाला जा रहा है। इसके बावजूद जमीन के मालिक रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिला।

बोकारो के दुग्दा थाना क्षेत्र में सिजुआ भूमि अधिग्रहण प्रभावित विस्थापितों ने मुआवजा और जमीन की रजिस्ट्री की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सिजुआ मौजा की करीब पौने पांच एकड़ रैयती जमीन पर BCCL की दामोदा कॉलियरी पिछले 17 महीनों से कोयला निकाल रही है, लेकिन प्रभावित रैयतों का आरोप है कि अब तक न CNT की अनुमति का आदेश जारी हुआ है, न जमीन की रजिस्ट्री हुई और न ही उन्हें मुआवजे के तौर पर एक रुपया मिला है।
सिजुआ भूमि अधिग्रहण प्रभावित विस्थापित सहकारी समिति के अध्यक्ष प्रीतम कुमार महतो के मुताबिक, खाता संख्या 10 और 6 की करीब पौने पांच एकड़ रैयती जमीन से पिछले 17 महीनों से कोयला निकाला जा रहा है। इसके बावजूद जमीन के मालिक रैयतों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है।
प्रीतम कुमार महतो का कहना है कि 25 अगस्त 2026 को दुग्दा थाना प्रभारी की मौजूदगी में BCCL की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया था कि 5 अक्टूबर तक जमीन की रजिस्ट्री कर दी जाएगी और उसी दिन मुआवजे का भुगतान भी किया जाएगा। लेकिन 5 अक्टूबर की तारीख भी गुजर गई और रैयतों के मुताबिक न रजिस्ट्री हुई और न भुगतान।
विस्थापितों का कहना है कि पिछले 17 महीनों में यह आठवां आश्वासन था, लेकिन हर बार की तरह इस बार भी वादा पूरा नहीं हुआ। इसी के विरोध में आज 7 अक्टूबर की सुबह 10 बजे से विस्थापितों ने शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया है।
धरनारत विस्थापितों की मांग स्पष्ट है-पहले मुआवजे का भुगतान किया जाए और जमीन की रजिस्ट्री की जाए। उनका कहना है कि जब तक पैसा हाथ में नहीं आता और भूमि की रजिस्ट्री नहीं होती, तब तक धरना समाप्त नहीं किया जाएगा।
अब देखना होगा कि विस्थापितों के आंदोलन के बाद BCCL प्रबंधन की ओर से क्या पहल की जाती है और 17 महीने से लंबित मुआवजा एवं रजिस्ट्री का मामला कब तक सुलझता है।
बोकारो से चंदन सिंह की रिपोर्ट













