बिहार के इतिहास को संरक्षित करने में साथ देगा IIT पटना, बिहार विरासत विकास समिति के साथ MoU
बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के वैज्ञानिक अध्ययन एवं आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनके संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई।

पटना: बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के वैज्ञानिक अध्ययन एवं आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनके संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। मंगलवार को बिहार विरासत विकास समिति एवं IIT पटना के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया गया। इस MoU का उद्देश्य बिहार की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों का वैज्ञानिक अध्ययन करना तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उनके संरक्षण एवं संवर्धन को नई दिशा देना है।
इस पहल के तहत बिहार की विभिन्न धरोहरों का LiDAR सर्वे किया जाएगा। वहीं GPR (Ground Penetrating Radar) के माध्यम से प्राचीन गढ़ों एवं टीलों की स्कैनिंग कर उनके भीतर छिपी पुरातात्विक संरचनाओं एवं अवशेषों का अध्ययन किया जा सकेगा। इसके साथ ही AI तकनीक का उपयोग कर प्राप्त आंकड़ों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। बिहार देश का पहला राज्य है, जिसने अपनी धरती के गर्भ में छिपे इतिहास और पुरातात्विक विरासत को समझने एवं संरक्षित करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का निर्णय लिया है। इसी उद्देश्य से IIT पटना के साथ मिलकर कार्य करने का निर्णय लिया गया है।
भविष्य में IIT पटना एवं कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार के संयुक्त प्रयास से एक Centre विकसित करने की भी योजना है। यह Centre बिहार की विभिन्न ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहरों के अध्ययन, तकनीकी दस्तावेजीकरण तथा वैज्ञानिक विधि से उनके संरक्षण की दिशा में कार्य करेगा। इस अवसर पर कृष्ण कुमार, निदेशक, राज्य पुरातत्व, IIT पटना के निदेशक प्रो. टीएन सिंह, डॉ. अक्षर पटेल, रजिस्ट्रार, IIT पटना, प्रो. अनिल कुमार, कार्यपालक निदेशक, बिहार विरासत विकास समिति, डॉ. सप्तऋषि चौधरी एवं तिष्य घोष सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे। यह पहल बिहार की समृद्ध विरासत को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए धरोहर संरक्षण और पुरातात्विक अनुसंधान के क्षेत्र में एक नई शुरुआत के रूप में महत्वपूर्ण है।










