जीविका दीदियों को अब तक दी गई 17,300 करोड़ राशि, संवर रही महिलाओं की तकदीरः मंत्री
ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों वर्ष 2006 में डाली गई जीविका की नींव आज वटवृक्ष का रूप ले चुकी है।

पटना: ग्रामीण विकास विभाग और सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों वर्ष 2006 में डाली गई जीविका की नींव आज वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। राज्य में सक्रिय 11 लाख 88 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) से एक करोड़ 81 जीविका दीदियां जुड़ी हैं। मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत अब तक 16 हजार 700 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जीविका दीदियों को दी जा चुकी है। इसके अलावा 600 करोड़ रुपये गुरुवार को जारी की गई है। इस तरह अब तक 17 हजार 300 करोड़ रुपये दीदियों के खाते में जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा इन दीदियों को बैंकों से 74 हजार 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की ऋण दिलायी जा चुकी है। दीदियों की यह ईमानदारी ही कही जाएगी कि इनमें 99 फीसदी दीदियों ने ऋण चुका दिया है।
मंत्री कुमार गुरुवार को ग्रामीण विकास विभाग की ओर से गांधी मैदान स्थित बापू सभागार में आयोजित समृद्ध महिला-समृद्ध बिहार कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि जीविका एक संस्था नहीं बल्कि विकसित बिहार की मजबूत स्तंभ हैं, जिसके माध्यम से बिहार आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयाम को छू रहा है। यह अदम्य साहस, सूझबूझ एवं दूरदर्शिता को प्रदर्शित करता विकसित भारत 2047 की आधारशिला है। मंत्री ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व से एक दिन पूर्व जीविका दीदियों को आर्थिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है जिसके तहत आज सातवीं चरण में कुल चार लाख जीविका दीदियों के खातों में 10-10 हजार रुपये का प्रोत्साहन और एक लाख दीदियों के खातों में 20-20 हजार रुपये दूसरी किस्त के रूप में अंतरण की जाएगी। इसके अलावा जीविका निधि से 10 हजार दीदियों को 50 करोड़ रुपये ऋण दी गई है। राज्य में जीविका दीदी लखपति बनकर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
कुमार ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में कई योजनाओं को लागू किया। उसी का परिणाम है कि आज हमारी बहनें तेजी के साथ आत्मनिर्भर हो रही हैं। देश में पहला राज्य बिहार है जहां सतत जीविकोपार्जन योजना लागू किया गया। ताड़ी, शराब बेचकर जिंदगी का गुजर-बसर करने वाले दो लाख एक हजार परिवारों को चिन्हित कर इस योजना के तहत राजकीय खजाने से एक रुपये से दो लाख रुपये तक का आर्थिक सहायता पहुंचाया गया और उन्हें वैकल्पिक रोजगार मुहैया कराया गया। उन्होंने कहा कि जीविका दीदियों के उत्पाद को उचित मूल्य और उनकी हुनर को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान मिल सके, इसके लिए सरकार तेजी से काम कर रही है। इसके लिए पंचायत, प्रखंड से लेकर जिला स्तर पर अत्याधुनिक बाजार-हाट का निर्माण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन हाट-बाजारों का जुड़ाव तकनीकी तौर पर राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर होगा ताकि बिहार राज्य में जीविका के हाथों तैयार उत्पादों से देश-विदेश के लोग रूबरू हो सकें।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि वर्ष 2005 में एनडीए की सरकार बनी तो बिहार में पहली बार महिला सशक्तीकरण और उनके आरक्षण का काम किया गया। आज उसी की कड़ी में समृद्ध महिला, समृद्ध बिहार अभियान की शुरुआत हो रहा है। इसके माध्यम से महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक नया अध्याय लिखने का काम किया जाएगा।
इससे पहले मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन विभाग के मंत्री श्री मदन सहनी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों की आवाज पर वर्ष 2016 में शराबबंदी को लागू किया। आज दृढ़ संकल्पों के साथ उन उद्देश्यों को मजबूती देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में जब सभी लोग घरों में रह रहे थे तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने जीविका दीदियों के सहारे करीब 30 लाख वंचित लोगों को राशन कार्ड से जोडने का काम किया था। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को कपड़ा सिलने की एक बड़ी जिम्मेदारी का निर्वहन इन जीविका दीदियों द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने शराबबंदी को लेकर चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय पटना की ओर से वर्ष 2023 और वर्ष 2025 में भारतीय प्रबंधन संस्थान रांची की ओर से कराए गए सर्वे और उसके परिणामों से रूबरू कराया।










