मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा ने सफलतापूर्वक पूरे किए दो वर्ष
राज्य सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा चलंत पशु अस्पताल ने बुधवार को सफलतापूर्वक अपनी सेवा के दो वर्ष पूरे कर लिए।

पटना: राज्य सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा चलंत पशु अस्पताल ने बुधवार को सफलतापूर्वक अपनी सेवा के दो वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर विकास भवन स्थित विभागीय सभागार में पशुपालन निदेशालय द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मंत्री, डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग नन्दकिशोर राम द्वारा “पशुपालकों के द्वार पर पशु चिकित्सा सेवाएँ- चलंत पशु अस्पताल हेतु मानक संचालन प्रक्रिया” तथा “बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025” पर तैयार पुस्तिका का विमोचन किया गया। इसके साथ ही राज्य की ब्रीडिंग पॉलिसी के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए विकसित वेबसाइट का भी लोकार्पण किया गया। उल्लेखनीय है कि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा का शुभारंभ 09 सितम्बर 2024 को माननीय मुख्यमंत्री द्वारा किया गया था। इस सेवा का प्रमुख उद्देश्य पशुपालकों को उनके घर पर ही समयबद्ध, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
मंत्री ने कहा कि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों ने पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सीधे पशुपालकों के द्वार तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इससे विशेष रूप से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ पशुधन ही पशुपालकों की आय, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राज्य की समृद्धि का मजबूत आधार है। सरकार पशु चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और पशुपालक-केंद्रित बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बाढ़ आपदा में जिलों में विभाग के पदाधिकारियों की कार्यों की सराहना की। विभागीय सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई सेवा से जुड़े सभी पशु चिकित्सकों, तकनीकी कर्मियों, कॉल सेंटर प्रतिनिधियों, वाहन चालकों तथा विभागीय अधिकारियों को द्वितीय वर्षगाँठ की बधाई दी। उन्होंने कहा कि दो वर्षों की यह उपलब्धि सेवा से जुड़े सभी कर्मियों के समर्पण और सतत प्रयास का परिणाम है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रीकांत शास्त्री, निदेशक पशुपालन ने बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम 2025 के लाभों को गिनाते हुए बताया कि इस अधिनियम के आने के बाद पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान से जुड़े सभी घटकों पर नियंत्रण हुआ है और इससे जुड़े संस्थानों और व्यक्तियों के पंजीकरण के लिए वेबसाइट के लोकार्पण से उन्हें सुविधा होगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पशुपालकों से प्राप्त प्रत्येक कॉल पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मोबाइल पशु चिकित्सा वाहन निर्धारित समय पर पशुपालक के द्वार पहुँचे तथा वाहनों में आवश्यक औषधियों और उपकरणों की उपलब्धता बनी रहे। सेवा की गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा पशुपालकों की संतुष्टि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
पशुपालक टोल-फ्री नंबर 1962 पर कॉल करके मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। कॉल सेंटर सप्ताह के सातों दिन चौबीसों घंटे कार्यरत है, जबकि मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों की सेवा प्रतिदिन प्रातः 8:30 बजे से अपराह्न 4:30 बजे तक उपलब्ध है। कार्यक्रम में विमोचित बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम, 2025 संबंधी पुस्तिका से पशु प्रजनन सेवाओं के विनियमन और गुणवत्तापूर्ण प्रजनन सामग्री के उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। वहीं, ब्रीडिंग पॉलिसी के कार्यान्वयन के लिए विकसित वेबसाइट से राज्य में पशु नस्ल सुधार कार्यक्रमों की निगरानी, पारदर्शिता और प्रभावशीलता को बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम में अपर सचिव, संयुक्त सचिव, कुमार रविन्द्र, डॉ सुनील कुमार ठाकुर, अपर निदेशक, पशुपालन सह परियोजना निदेशक, BLDA, विभाग एवं पशुपालन निदेशालय के वरीय पदाधिकारी, पशु चिकित्सक, मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई से जुड़े प्रतिनिधि तथा अन्य कर्मी उपस्थित थे। सभी प्रतिभागियों ने मोबाइल पशु चिकित्सा सेवा को अधिक सुदृढ़ बनाते हुए राज्य के प्रत्येक जरूरतमंद पशुपालक तक पहुँचाने का संकल्प लिया।










