कृषि ड्रोन को मिलेगा बढ़ावा, 480 किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर होंगे स्थापित: कृषि मंत्री
बिहार में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों तक नई तकनीकी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है।

पटना: बिहार में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों तक नई तकनीकी सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। चतुर्थ कृषि रोड मैप के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य में 480 किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से किसानों को उनके क्षेत्र में ही ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं सुलभ कराई जाएंगी। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर के माध्यम से किसान स्वयं ड्रोन खरीदने के बजाय आवश्यकता के अनुसार कस्टम हायरिंग सेंटर से ड्रोन सेवा प्राप्त कर सकेंगे। इससे कम समय में अधिक क्षेत्र में कृषि आदानों के छिड़काव सहित विभिन्न कृषि कार्यों को प्रभावी ढंग से करने में सहायता मिलेगी।
उन्होंने बताया कि किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए प्रत्येक केंद्र की परियोजना लागत 10 लाख रुपये निर्धारित की गई है। कृषि में स्नातक आवेदकों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत, अधिकतम 5 लाख रुपये तथा गैर-कृषि में स्नातक आवेदकों को 40 प्रतिशत, अधिकतम 4 लाख रुपये तक अनुदान दिया जाएगा। 480 किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए कुल 24 करोड़ रुपये का व्यय किया जाएगा। जिलों में किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर का लक्ष्य संबंधित जिले में प्रखंडों की संख्या के आधार पर निर्धारित किया गया है।
सिन्हा ने कहा कि ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों में कीटनाशी, पोषक तत्व एवं अन्य कृषि आदानों के छिड़काव जैसे कार्य कम समय में किए जा सकते हैं। किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित होने से किसानों को ड्रोन खरीदने के लिए बड़ी राशि खर्च करने की आवश्यकता नहीं होगी। किसान अपनी आवश्यकता के अनुसार इन केंद्रों से ड्रोन सेवा प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। कस्टम हायरिंग की व्यवस्था के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीक को किसानों तक सेवा के रूप में पहुंचाया जा सकेगा। इससे कृषि कार्यों में समय एवं श्रम की बचत के साथ-साथ तकनीक के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना से किसानों को आधुनिक कृषि सेवा उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं आय के नए अवसर भी सृजित होंगे। कृषि में स्नातक युवाओं को विशेष रूप से ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं के क्षेत्र में उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि क्षेत्र में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें नई तकनीक से जोड़ने के लिए इस प्रकार की पहल महत्वपूर्ण है। ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में प्रशिक्षित एवं सक्षम युवा किसानों को आधुनिक कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ स्वयं भी रोजगार एवं व्यवसाय का अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
सिन्हा ने कहा कि किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना बिहार में कृषि यंत्रीकरण को नई गति देने के साथ खेती में आधुनिक तकनीक के उपयोग को गांव-गांव तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। हमारा लक्ष्य किसानों को आधुनिक तकनीक सुलभ कराने के साथ कृषि को अधिक दक्ष, तकनीक-सक्षम और लाभकारी बनाना है।










