विसर्जन के दौरान हादसा, 3 बच्चियां डूबी, 2 को ग्रामीणों ने बचाया, एक की मौत
रोहतास जिले में बुधवार की सुबह कर्मा धर्मा झूर विसर्जन के दौरान एक नहर में तीन बच्चियां डूब गईं।

सासाराम/औरंगाबाद : रोहतास जिले में बुधवार की सुबह कर्मा धर्मा झूर विसर्जन के दौरान एक नहर में तीन बच्चियां डूब गईं। इस हादसे में स्थानीय ग्रामीणों की तत्परता से दो बच्चियों को सकुशल बचा लिया गया, जबकि एक बच्ची की डूबने से मौत हो गई। घटना बिक्रमगंज थाना क्षेत्र के रमनडिहरा गांव की बताई जाती है।
कर्मा धर्मा झूर विसर्जन के दौरान हादसा
घटना उस वक्त हुई, जब मंगलवार की सुबह विद्यालय के समीप नहर पुल पर कर्मा धर्मा झूर विसर्जन के दौरान गांव की कुछ बच्चियां नहर किनारे गईं थीं। विसर्जन के दौरान कुछ बच्चियां नहर में प्रवेश करने लगीं, तभी तीन बच्चियां अचानक गहरे पानी में चली गईं और डूबने लगीं।
शोर मचाने पर पहुंचे ग्रामीण
वहीं तीन बच्चियों को डूबता देखकर अन्य लड़कियों ने जब शोर मचाना शुरू किया, तो आसपास मौजूद ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई और उन्होंने तत्परता दिखाते हुए नहर में कूद कर दो बच्चियों को सकुशल बाहर निकाल लिया। हालांकि इस क्रम में ग्रामीणों ने तीनों बच्चियों को बचाने के लिए काफी मशक्कत किया, लेकिन एक बच्ची को नहीं बचाया जा सका।
गांव में पसरा मातम
मृतका की पहचान रमनडीहरा गांव निवासी सुनील सिंह की 14 वर्षीय पुत्री गुड़िया कुमारी के रूप में हुई है। घटना के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। इधर, घटना की जानकारी मिलने के बाद मौके पर पहुंची बिक्रमगंज थाने की पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल सासाराम भेज दिया है और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
सिंघना गांव में कर्म पूजा के अवशेष विसर्जन के दौरान डूबी 4 युवतियां, एक की हुई मौत, 2 घंटे बाद मिला शव
औरंगाबाद जिले के सिंघना गांव में करमा का त्योहार मातम में बदल गया। गांव के दीपक सिंह की बड़ी बेटी आकांक्षा कुमारी (17 वर्ष) की पोखर में डूबने से मौत हो गई। आकांक्षा अपनी तीन सहेलियों पायल कुमारी, छाया कुमारी और पुष्पांजलि कुमारी के साथ करमा पूजा के अवशेष विसर्जन करने गांव के पोखर पर गई थी। विसर्जन के दौरान आकांक्षा गहरे पानी में चली गई और डूबने लगी।

डूबती सहेली को देख तीनों सहेलियों ने भी पोखर में छलांग लगा दी
आपको बता दें कि डूबती सहेली को देख तीनों सहेलियों ने भी पोखर में छलांग लगा दी। चारों एक साथ डूबने-उतराने लगीं। शोर सुनकर ग्रामीण दौड़े और बड़ी मशक्कत के बाद तीन युवतियों को बचा लिया, लेकिन आकांक्षा गहराई में समा गई। आकांक्षा एक भाई एक बहन में सबसे बड़ी थी। छोटा भाई अपनी दीदी की याद में मां-पिता से लिपटकर 'दीदी उठो न...' कहकर रो-रोकर बेहाल हो रहा है। मां की आंखों के आंसू सूख चुके हैं, पिता बेसुध बैठे हैं।
आकांक्षा की शादी तय हो चुकी थी और एक साल बाद उसकी डोली उठनी थी
बताया जाता है कि आकांक्षा की शादी तय हो चुकी थी और एक साल बाद उसकी डोली उठनी थी। डोली से पहले ही उसकी अर्थी उठ गई। वहीं बची तीनों युवतियों को इलाज के लिए बालूगंज निजी क्लिनिक ले जाया गया, जहां से उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। सदर अस्पताल में तीनों की स्थिति सामान्य बताई जा रही है। घटना की सूचना पर अंबा पुलिस गांव पहुंची और पूरे मामले की तहकीकात की। ग्रामीणों ने बताया कि चारों सहेलियों एक दूसरे की पूरक थी और हमेशा साथ ही रहा करती थी। लेकिन कुदरत ने एक को जुदा कर दिया।
सासाराम/औरंगाबाद से दिवाकर कुमार और रुपेश कुमार की रिपोर्ट










