पटना में मोदी मंदिर की मुहिम चलाने वाले राजन सिंह के किन्नर होने पर उठे सवाल, लखनऊ में FIR, क्या बोले?
पटना में पीएम मोदी का मंदिर बनाने की मुहिम और दिल्ली के प्रेस क्लब में “मोदी चालीसा” के पाठ से राजन सिंह चर्चा में हैं। राजन सिंह के खिलाफ लखनऊ की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट प्रियंका ने हजरतगंज थाने में शिकायत/एफआईआर कराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।

स्वराज पोस्ट विशेष रिपोर्ट | पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने की मुहिम और दिल्ली के प्रेस क्लब में “मोदी चालीसा” के पाठ ने एक शख्स को अचानक सुर्खियों में ला दिया है—राजन सिंह। लेकिन जितनी तेजी से उनका यह अभियान चर्चा में आया, उतनी ही तेजी से उनके खिलाफ सवाल भी खड़े होने लगे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर राजन सिंह कौन हैं? क्या वे वास्तव में ट्रांसजेंडर/किन्नर हैं? और क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने की उनकी मुहिम बिहार के ट्रांसजेंडर समुदाय की सामूहिक मांग है या उनका व्यक्तिगत राजनीतिक-सामाजिक अभियान? इन सवालों की पड़ताल के लिए स्वराज पोस्ट ने राजन सिंह से लंबी बातचीत की। बातचीत में राजन ने अपने अभियान, ट्रांसजेंडर पहचान, राजनीति से अपने संबंध और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर के प्रस्ताव को लेकर कई दावे किए।
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमारे आराध्य हैं, पटना में मंदिर बनना चाहिए”
राजन सिंह का दावा है कि 29 जुलाई को हुई बिहार किन्नर कल्याण बोर्ड की बैठक में उन्होंने पटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने का प्रस्ताव रखा था। उनके मुताबिक प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है और इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया गया है।
राजन कहते हैं—देश में किसी पीएम ने ट्रांसजेंडरों को अधिकार नहीं दिया, जैसा पीएम मोदी ने दिया है। इसलिए हम चाहते थे कि अपने आराध्य का मंदिर बनाएं। भगवान श्री नरेंद्र मोदी का पटना में मंदिर बने।
राजन का दावा है कि उन्होंने मंदिर के लिए पांच एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये की मांग की है। उनका कहना है कि बोर्ड में मौजूद लोगों ने प्रस्ताव पर सहमति जताई और इसे सरकार को भेजा गया। हालांकि इस दावे की पुष्टि को लेकर बोर्ड के भीतर ही मतभेद सामने आ रहे हैं।
बोर्ड की सदस्य ने दावे पर उठाए सवाल
बिहार ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड की सदस्य अनुप्रिया का कहना है कि बोर्ड में ऐसा कोई निर्णय नहीं हुआ। उनके मुताबिक यह राजन सिंह का व्यक्तिगत विचार हो सकता है और हर व्यक्ति को अपनी श्रद्धा रखने का अधिकार है, लेकिन इसे पूरे ट्रांसजेंडर समुदाय की सामूहिक मांग नहीं माना जा सकता।
अनुप्रिया ने यह भी कहा कि संभव है कि राजन इस अभियान के जरिए राजनीतिक लाभ हासिल करना चाहते हों। यहीं से विवाद और गहरा जाता है।
लखनऊ में दर्ज हुआ मुकदमा, “फेक किन्नर” होने का आरोप
राजन सिंह के खिलाफ लखनऊ की ट्रांसजेंडर एक्टिविस्ट प्रियंका ने हजरतगंज थाने में शिकायत/एफआईआर कराते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि राजन कथित तौर पर फर्जी तरीके से खुद को किन्नर बताते हैं और अपने व्यक्तिगत अभियान में किन्नर समुदाय का नाम इस्तेमाल कर उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
प्रियंका का सवाल है कि राजन वास्तव में ट्रांसजेंडर हैं या नहीं, इसकी जांच होनी चाहिए। राजन का जवाब-मेरा ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट फेक कैसे हो सकता है?
इन आरोपों पर राजन सिंह ने पलटवार किया।
उनका कहना है कि उनके पास ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र है और इसलिए उनकी पहचान पर सवाल उठाना राजनीतिक साजिश है। राजन ने आरोप लगाया कि प्रियंका राजनीतिक रूप से कांग्रेस से जुड़ी हैं और उनके खिलाफ इसलिए अभियान चला रही हैं क्योंकि उन्होंने राहुल गांधी के परिवार को लेकर सवाल उठाए थे।
राजन का कहना है—मेरा ट्रांसजेंडर सर्टिफिकेट बना है, वह फेक कैसे हो सकता है। वह राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा कर रही हैं। हालांकि इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यही है कि राजन की ट्रांसजेंडर पहचान से संबंधित दस्तावेजों की स्वतंत्र और आधिकारिक जांच हुई है या नहीं। आरोप और जवाब के बीच वास्तविक स्थिति सामने आना अभी बाकी है।
मोदी चालीसा क्यों?
राजन सिंह ने दिल्ली के प्रेस क्लब में मोदी चालीसा का पाठ किया। उनका कहना है कि यह चालीसा उन्होंने खुद लिखी है और अब हर गुरुवार इसका पाठ किया जाएगा। उनके मुताबिक अगला पाठ पटना में होगा।
जब उनसे पूछा गया कि क्या भाजपा या केंद्र सरकार के किसी बड़े नेता ने उनके मंदिर अभियान को समर्थन दिया है, तो उन्होंने किसी नेता की ओर से सीधे समर्थन की बात से इनकार किया। हालांकि उनका दावा है कि ट्रांसजेंडर समुदाय के बीच इस अभियान को लेकर आम सहमति है। दूसरी ओर, बोर्ड की सदस्य अनुप्रिया इस दावे से सहमत नजर नहीं आतीं।
“अगर सरकार ने पैसे नहीं दिए तो इस्तीफा दे देंगे”
राजन सिंह का अभियान सिर्फ बयान तक सीमित नहीं है। उन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि बिहार सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंदिर के लिए जमीन और धन उपलब्ध नहीं कराती है तो वे किन्नर कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देंगे। दिलचस्प बात यह है कि राजन पहले भी बोर्ड से इस्तीफा दे चुके हैं।
पहले भी दे चुके हैं इस्तीफा
अगस्त 2025 में किन्नर कल्याण बोर्ड का सदस्य बनने के बाद राजन ने एक बार इस्तीफा दिया था। मार्च 2026 में संसद से ट्रांसजेंडर प्रोटेक्शन बिल पारित होने के बाद भी उन्होंने इस्तीफा देने की बात कही। इस कानून को लेकर ट्रांसजेंडर समुदाय के एक बड़े हिस्से ने आपत्ति जताई थी। राजन का दावा है कि उनके विरोध के कारण ही यह कानून अब तक अधिसूचित नहीं हुआ है।
हालांकि जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि जिस सरकार और प्रधानमंत्री का वे लगातार समर्थन कर रहे हैं, उसी सरकार के कानून का ट्रांसजेंडर समुदाय विरोध कर रहा है, तो वे इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
अमित शाह से कनेक्शन का दावा
राजन सिंह अपने राजनीतिक सफर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी जोड़ते हैं। उनका दावा है कि जब उन्होंने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के खिलाफ चुनाव लड़ा था, तब अमित शाह ने उन्हें बुलाकर बिहार में सक्रिय होने के लिए कहा था।
राजन का कहना है कि 8 अगस्त 2025 को अमित शाह के सीतामढ़ी दौरे के दिन ही समाज कल्याण विभाग ने उन्हें किन्नर कल्याण बोर्ड का उपाध्यक्ष बनाया। हालांकि इस दावे पर भी आधिकारिक राजनीतिक पुष्टि अलग से जरूरी है।
सारण के गांव से दिल्ली की राजनीति तक
राजन सिंह मूल रूप से बिहार के सारण जिले के एकमा क्षेत्र के मड़बा बसैया गांव के रहने वाले बताए जाते हैं। उनके अनुसार वे वर्ष 2026 में दिल्ली विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट कॉलेज में पढ़ने गए थे, लेकिन ट्रांसजेंडर पहचान से संबंधित विवाद के कारण उन्हें वहां से हटाया गया। इसके बाद उन्होंने मेरठ से पढ़ाई जारी रखने की बात कही।
कुछ समय विभिन्न संस्थाओं में काम करने के बाद वे राजनीति और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय हुए।
नागमणि कुशवाहा के साथ भी काम करने का दावा
राजन के बारे में यह भी चर्चा है कि वे बिहार के राजनेता नागमणि कुशवाहा के साथ काम कर चुके हैं। कुछ लोग उन्हें उनके निजी सहायक के रूप में भी बताते हैं।
राजन खुद बताते हैं कि वे सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों के जरिए ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर सक्रिय रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में ट्रांसजेंडरों के लिए अलग शौचालय की मांग को लेकर अभियान चलाने की बात भी कही है।
2024 लोकसभा चुनाव में भी उतरे
राजन सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। उन्हें कथित तौर पर महज 324 वोट मिले, लेकिन चुनाव के दौरान उन्हें मीडिया में अच्छी-खासी चर्चा मिली। यही वह दौर बताया जाता है, जिसके बाद उनकी राजनीतिक पहचान और दिल्ली के सत्ता गलियारों तक पहुंच को लेकर चर्चाएं तेज हुईं।
असली सवाल अब भी वही है
राजन सिंह की कहानी कई परतों वाली है—एक तरफ वे खुद को ट्रांसजेंडर अधिकारों की आवाज बताते हैं, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना आराध्य मानकर उनके मंदिर की मांग कर रहे हैं। वे अपने राजनीतिक संपर्कों में अमित शाह का नाम लेते हैं, लेकिन किसी बड़े भाजपा नेता के सीधे समर्थन से इनकार करते हैं। उनके खिलाफ फर्जी किन्नर होने के आरोप लगे हैं, जबकि वे अपने ट्रांसजेंडर प्रमाणपत्र को इसका जवाब बताते हैं।
लेकिन सवाल अभी खत्म नहीं हुआ है।
क्या पटना में सचमुच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंदिर बनाने का कोई आधिकारिक सरकारी प्रस्ताव बिहार सरकार के पास पहुंचा है?
क्या किन्नर कल्याण बोर्ड ने वास्तव में ऐसा प्रस्ताव पारित किया?
क्या पांच एकड़ जमीन और 112 करोड़ रुपये की मांग बोर्ड की आधिकारिक मांग है?
और सबसे अहम—राजन सिंह की ट्रांसजेंडर पहचान को लेकर उठे सवालों का आधिकारिक सत्य क्या है?
इन सवालों के जवाब दस्तावेजों और आधिकारिक जांच से ही सामने आएंगे।
फिलहाल इतना तय है कि पटना में मोदी मंदिर की मुहिम ने राजन सिंह को चर्चा के केंद्र में ला दिया है—लेकिन इस मुहिम के साथ अब आस्था से कहीं बड़ा सवाल उनकी पहचान, राजनीति और दावों की विश्वसनीयता को लेकर खड़ा हो गया है।
स्वराज पोस्ट की पड़ताल जारी है।
अनूप नारायण सिंह











