भोरे में सैनिक स्कूल की सौगात, अब ग्रामीण इलाकों में भी संवरेगा देश के भावी जांबाज़ों का भविष्य
गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड में प्रस्तावित सैनिक स्कूल को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। डूमर नरेंद्र पंचायत के खलवा गांव में सैनिक स्कूल के लिए करीब 5 एकड़ भूमि आवंटित की गई है।

गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड में प्रस्तावित सैनिक स्कूल को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। डूमर नरेंद्र पंचायत के खलवा गांव में सैनिक स्कूल के लिए करीब 5 एकड़ भूमि आवंटित की गई है। इस विद्यालय के स्थापित होने से भोरे ही नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण का अवसर मिलने की उम्मीद है।
भोरे विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से विकास की चुनौतियों से जूझता रहा है। गोपालगंज जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर होने के कारण इस क्षेत्र में शिक्षा, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं के विकास को लेकर लोगों की अपेक्षाएं हमेशा रही हैं। ऐसे में सैनिक स्कूल की स्थापना को क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राजनीतिक इतिहास से जुड़ा रहा है भोरे
भोरे विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास भी काफी महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 1977 से विधानसभा क्षेत्र आरक्षित है । आरक्षित कोटे से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर जमुना राम विधायक निर्वाचित हुए। समय-समय पर कई नेताओं ने इस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया, लेकिन लंबे समय तक भोरे की राजनीति में चंद्रिका बाबू के परिवार का प्रभाव प्रमुख रहा है।
वर्तमान समय में भोरे विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व एनडीए के जदयू कोटे से विधायक सुनील कुमार कर रहे हैं, जो चंद्रिका बाबू के पुत्र हैं। उनके नेतृत्व में क्षेत्र में विकास की नई योजनाओं को लेकर लोगों में उम्मीद बढ़ी है।
सैनिक स्कूल के साथ बालिका छात्रावास भी बनेगा
सैनिक स्कूल के ठीक बगल में बिहार सरकार की योजना के तहत जननायक कर्पूरी ठाकुर बालिका छात्रावास के लिए भी करीब एक एकड़ जमीन आवंटित की गई है। एक ही क्षेत्र में सैनिक स्कूल और बालिका छात्रावास जैसी शैक्षणिक सुविधाओं का विकसित होना शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सैनिक स्कूल और बालिका छात्रावास की योजनाएं धरातल पर पूरी तरह आकार लेती हैं, तो भोरे के इस पिछड़े इलाके में शिक्षा का एक नया केंद्र विकसित हो सकता है। इससे विद्यार्थियों को बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ आसपास के गांवों में सड़क, परिवहन, बाजार और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को भी गति मिलने की उम्मीद है।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट











