मां बनने के सपनों की नई उम्मीद IVF स्पेशलिस्ट डॉ रश्मि प्रसाद, निःसंतान दंपतियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं
पटना। संतान सुख की चाह रखने वाले दंपतियों के लिए आधुनिक चिकित्सा तकनीक (IVF) नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है। इसी दिशा में पटना की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ रश्मि प्रसाद मातृत्व के सपनों को साकार करने की दिशा में एक भरोसे का नाम है।

पटना। संतान सुख की चाह रखने वाले दंपतियों के लिए आधुनिक चिकित्सा तकनीक (IVF) नई उम्मीद बनकर सामने आ रहा है। इसी दिशा में पटना की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ रश्मि प्रसाद मातृत्व के सपनों को साकार करने की दिशा में एक भरोसे का नाम है। वह दिव्या वात्सल्या ममता फर्टिलिटी सेंटर के माध्यम से निःसंतानता से जुड़ी समस्याओं के उपचार और परामर्श की सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं।
20 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ महिलाओं के स्वास्थ्य और निःसंतानता उपचार के क्षेत्र में सक्रिय डॉ रश्मि प्रसाद के पास एमबीबीएस (ऑनर्स), डीजीओ और इनफर्टिलिटी से संबंधित स्नातकोत्तर डिप्लोमा की शैक्षणिक योग्यताएं हैं। सेंटर की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, वे आईवीएफ विशेषज्ञ के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
निःसंतानता की समस्या से जूझ रहे दंपतियों के लिए विशेषज्ञ परामर्श
बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र और विभिन्न स्वास्थ्य संबंधी कारणों से कई दंपतियों को संतान प्राप्ति में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में समय पर चिकित्सकीय जांच, सही परामर्श और आवश्यकता के अनुसार उपचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ रश्मि प्रसाद ने कहा-शादी के एक-दो साल बाद भी अगर दंपत्ति को बच्चा नहीं हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में पति और पत्नी दोनों को किसी विशेषज्ञ इनफर्टिलिटी डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। डॉक्टर के मुताबिक, बच्चा नहीं होने की समस्या के लिए सिर्फ महिला को जिम्मेदार मानना गलत है। इसके लिए पुरुष के शुक्राणुओं (Sperm) और महिला के अंडाणुओं (Eggs) दोनों की जांच जरूरी है। इनफर्टिलिटी की समस्या में पति और पत्नी दोनों की जिम्मेदारी बराबर होती है।
IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) और ICSI (इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन) तकनीक के जरिए संतान प्राप्ति की संभावना बढ़ाई जा सकती है। IVF में महिला के अंडाणु और पुरुष के शुक्राणु को लैब में मिलाकर भ्रूण (Embryo) तैयार किया जाता है। वहीं ICSI में एक स्वस्थ शुक्राणु को सीधे अंडाणु में इंजेक्ट किया जाता है।
डॉक्टर ने बताया कि महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ अंडाणुओं की संख्या और गुणवत्ता कम होने लगती है। एक बार अंडाणुओं का भंडार समाप्त हो जाने पर उसे दवाओं से दोबारा बढ़ाना संभव नहीं है। इसलिए उम्र बढ़ने के बाद इलाज में देरी करना नुकसानदायक हो सकता है।
लोगों के मन में IVF को लेकर यह धारणा भी है कि यह काफी महंगा इलाज है। इसी वजह से कई दंपत्ति इलाज कराने में देरी करते हैं। हालांकि, IVF हर मामले में आखिरी विकल्प नहीं होता। मरीज की स्थिति के अनुसार यह शुरुआती उपचार विकल्प भी हो सकता है। डॉक्टर ने सलाह दी कि संतान प्राप्ति में परेशानी होने पर समय रहते जांच और सही उपचार कराना चाहिए।
आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन
बता दें कि आईवीएफ यानी इन विट्रो फर्टिलाइजेशन एक ऐसी चिकित्सा तकनीक है, जिसमें अंडाणु और शुक्राणु को प्रयोगशाला में निषेचित करने के बाद भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया जाता है। हालांकि, हर दंपति को आईवीएफ की आवश्यकता नहीं होती। उपचार का चयन संबंधित जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है।
डॉ. रश्मि प्रसाद का दिव्या वात्सल्या ममता फर्टिलिटी सेंटर पटना के पाटलिपुत्र कॉलोनी क्षेत्र में स्थित है। सेंटर निःसंतानता से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे दंपतियों को विशेषज्ञ परामर्श उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कार्यरत है। डॉ. रश्मि प्रसाद को चिकित्सा क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे स्त्री एवं प्रसूति रोग तथा निःसंतानता से जुड़ी समस्याओं के समाधान की दिशा में काम कर रही हैं।













