प्रार्थना सभा में एक-एक कर गिरने लगी छात्राएं, एक दिन बाद फिर से विद्यालय की छात्राएं हुई बीमार
जमुई के खैरा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में शनिवार की सुबह कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। प्रार्थना के दौरान एक के बाद एक नौ छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई, जिससे विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई।

जमुई:-सरकार बेटियों की सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन सवाल तब खड़े होते हैं जब सरकारी आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाली छात्राएं प्रार्थना की कतार में अचानक बीमार पड़ने लगे। जमुई के खैरा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में शनिवार की सुबह कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। प्रार्थना के दौरान एक के बाद एक नौ छात्राओं की तबीयत बिगड़ गई, जिससे विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई।
छात्राओं को उल्टी, लूज मोशन, चक्कर और बुखार की शिकायत के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना पड़ा। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी आवासीय विद्यालय में बच्चियों की तबीयत इस तरह क्यों बिगड़ी? क्या भोजन और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच होती है? क्या गर्मी से बचाव के पर्याप्त इंतजाम हैं? फिलहाल कारणों की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन घटना ने विद्यालय प्रबंधन और जिला प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
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खैरा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में शनिवार सुबह करीब 9:30 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब प्रार्थना के लिए कतार में खड़ी छात्राओं में अचानक कुछ की तबीयत बिगड़ने लगी। कुछ छात्राओं को चक्कर आया और वे गिर पड़ीं। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन ने आनन-फानन में प्रभावित छात्राओं को खैरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
विद्यालय की वार्डन सोनी कुमारी ने बताया कि प्रार्थना के दौरान छात्राओं की तबीयत अचानक खराब होने लगी। कुछ छात्राएं चक्कर खाकर गिर गईं, जिसके बाद सभी प्रभावित छात्राओं को तत्काल अस्पताल ले जाया गया।
प्रभारी चिकित्सक डॉ अमित आनंद के अनुसार अस्पताल में कुल नौ छात्राओं को इलाज के लिए लाया गया था। छात्राओं में उल्टी और लूज मोशन की शिकायत थी। चिकित्सकों ने फूड पॉइजनिंग, डिहाइड्रेशन अथवा अत्यधिक गर्मी को संभावित कारण माना है। कुछ छात्राओं को बुखार की भी शिकायत थी। सभी को आवश्यक दवाएं दी गईं और जरूरत के अनुसार स्लाइन चढ़ाया गया।
डॉ शीनू कुमारी ने बताया कि उपचार के बाद फिलहाल सभी छात्राओं की स्थिति खतरे से बाहर है। हालांकि छात्राओं की तबीयत बिगड़ने के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। विद्यालय में पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने की संभावना को भी जांच के दायरे में रखा गया है। अस्पताल लाई गई छात्राओं में बबली हेंब्रम, नंदनी कुमारी, सरस्वती मरांडी, प्रिया हासा, चांदनी कुमारी, सुनीता मुरमुर, फूलमणि हेमरम और अनीषा टुडू सहित अन्य छात्राएं शामिल थीं।
घटना के बाद विद्यालय प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग छात्राओं की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि इस घटना ने आवासीय विद्यालयों में भोजन, पेयजल, स्वच्छता और गर्मी से बचाव की व्यवस्था की नियमित निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरत है कि प्रशासन केवल घटना के बाद इलाज कराने तक सीमित न रहे, बल्कि विद्यालय में उपलब्ध भोजन और पानी की गुणवत्ता की जांच कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर नौ छात्राओं की एक साथ तबीयत बिगड़ने के पीछे वास्तविक वजह क्या थी।
जमुई से हेमंत सक्सेना की रिपोर्ट











