स्वास्थ्य विभाग को ही 'अस्वस्थ' कर रहा सिस्टम! 3-4 महीने से वेतन के लिए तरस रहीं ANM
गोपालगंज: स्वास्थ्य व्यवस्था को गांव-गांव तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाली एएनएम कर्मियों को पिछले तीन से चार महीने से वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। विजयीपुर, भोरे और कटेया समेत कई प्रखंडों में कार्यरत एएनएम कर्मियों का आरोप है।

गोपालगंज: स्वास्थ्य व्यवस्था को गांव-गांव तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाली एएनएम कर्मियों को पिछले तीन से चार महीने से वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। विजयीपुर, भोरे और कटेया समेत कई प्रखंडों में कार्यरत एएनएम कर्मियों का आरोप है कि विभागीय व्यवस्था की खामियों का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।
बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग ने कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए फिंगरप्रिंट आधारित बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य किया था। विभागीय आदेश के बाद स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात कर्मियों को इसी माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी थी। लेकिन कई स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त बायोमेट्रिक मशीन उपलब्ध नहीं होने के कारण फील्ड में काम करने वाली एएनएम कर्मियों को शुरुआत में उपस्थिति दर्ज कराने में परेशानी हुई।
इसके बाद विभाग की ओर से मुख्यालय में बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज कराने का निर्देश दिया गया। कर्मियों का कहना है कि उन्होंने विभाग के निर्देश का पालन करते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज करानी शुरू कर दी, लेकिन इसके बावजूद कई एएनएम को अब तक वेतन का भुगतान नहीं किया गया है।
एक ही विभाग में दो अलग-अलग व्यवस्था क्यों?
कर्मियों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बायोमेट्रिक उपस्थिति को वेतन भुगतान से जोड़ा गया है, तो जिन कर्मियों की उपस्थिति दर्ज हो रही है, उनका वेतन क्यों रोका गया है?
एएनएम कर्मियों का दावा है कि कुछ चिकित्सकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति को लेकर भी अलग व्यवस्था दिखाई दे रही है, जबकि उनका वेतन नियमित रूप से जारी हो रहा है। ऐसे में कर्मियों ने सवाल उठाया है कि एक ही विभाग में कर्मचारियों के लिए अलग-अलग नियम क्यों?
‘आवंटन नहीं है’ कहकर टाला जा रहा भुगतान
पीड़ित एएनएम कर्मियों के अनुसार, जब वे वेतन भुगतान को लेकर संबंधित कार्यालय के लिपिक से संपर्क करती हैं, तो उन्हें कथित तौर पर बताया जाता है कि आवंटन उपलब्ध नहीं है, राशि आने के बाद वेतन का भुगतान किया जाएगा।
लेकिन कर्मियों का कहना है कि जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में अगस्त माह तक का वेतन भुगतान हो चुका है। थावे समेत कई स्थानों पर भुगतान होने की बात सामने आने के बाद सवाल और गंभीर हो गया है कि आखिर विजयीपुर,भोरे और कटेया क्षेत्र की एएनएम का वेतन क्यों लंबित है?
वेतन नहीं मिलने से परिवार पर बढ़ा आर्थिक दबाव
कई महीनों से वेतन लंबित होने के कारण एएनएम कर्मियों के सामने आर्थिक संकट गहराने की बात कही जा रही है। कर्मियों का कहना है कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
एएनएम कर्मी स्वास्थ्य विभाग की जमीनी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े कार्यों के साथ टीकाकरण, स्वास्थ्य जागरूकता और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रहती है।
ऐसे में सवाल उठता है कि जो कर्मचारी गांव-गांव जाकर जच्चा-बच्चा की स्वास्थ्य व्यवस्था संभाल रही हैं, उन्हें ही महीनों तक वेतन से वंचित रखना आखिर किस व्यवस्था का हिस्सा है? मामले में संबंधित प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। अब सवाल जिला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी उठ रहे हैं।
मामले की जांच कर लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान की मांग
कर्मियों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों से मामले की जांच कर लंबित वेतन का शीघ्र भुगतान कराने तथा बायोमेट्रिक उपस्थिति और वेतन भुगतान से जुड़ी तकनीकी अथवा प्रशासनिक खामियों को दूर करने की मांग की है।
अब देखना होगा कि गोपालगंज के जिलाधिकारी और सिविल सर्जन डॉ. एमडी इजरायल इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और महीनों से वेतन का इंतजार कर रहीं एएनएम कर्मियों को कब तक राहत मिलती है।
गोपालगंज से कुमार प्रदीप की रिपोर्ट










