अजय मांझी मौत मामला: पीड़ित परिवार से मिले अरुण भारती, निष्पक्ष जांच की मांग
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के बिहार प्रभारी एवं जमुई सांसद अरुण भारती ने बुधवार को गया जिले के महकार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोरबा निवासी अजय मांझी के परिजनों से मुलाकात की।

गया: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के बिहार प्रभारी एवं जमुई सांसद अरुण भारती ने बुधवार को गया जिले के महकार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोरबा निवासी अजय मांझी के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने शोकाकुल परिवार से घटना की पूरी जानकारी ली तथा उन्हें हर संभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
परिजनों के अनुसार, अजय मांझी ईंट-भट्ठे पर मजदूरी का काम करते थे। इसी दौरान ईंट-भट्ठा मालिक के साथ किसी बात को लेकर उनका विवाद हुआ था। इसके बाद पुलिस द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर थाने लाया गया। परिजनों का आरोप है कि थाने में रहने के दौरान अजय मांझी फांसी के फंदे से लटके हुए मृत पाए गए। इस घटना को लेकर मृतक के परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिजनों का कहना है कि अजय मांझी की मौत के पीछे की वास्तविक सच्चाई सामने आनी चाहिए।
वहीं अरुण भारती ने परिजनों की बात गंभीरता से सुनी और कहा कि घटना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा जांच में जो भी तथ्य सामने आएं, उसके आधार पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी सवाल उठाया कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री एवं स्थानीय जनप्रतिनिधि जीतन राम मांझी की ओर से पीड़ित परिवार से मिलने के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा, जबकि घटना उनके क्षेत्र से संबंधित है। उन्होंने कहा कि ऐसी दुखद घटना में पीड़ित परिवार के साथ खड़ा होना और उनकी पीड़ा सुनना जनप्रतिनिधियों की सामाजिक जिम्मेदारी है।
अरुण भारती ने शोकाकुल परिवार को सांत्वना देते हुए कहा कि इस कठिन परिस्थिति में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने परिवार को आर्थिक सहायता भी प्रदान की तथा भविष्य में भी हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्षता के साथ जांच कर सच्चाई सामने लाने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
ज्ञात हो कि 35 वर्षीय अजय मांझी गया जिले के चाकन्द के मूल निवासी थे और वह पटना जिले के सिगोड़ी थाना क्षेत्र में एक ईंट-भट्टे पर मजदूरी का काम करते थे। ईंट-भट्टा मालिक के साथ पैसों के लेनदेन के विवाद के बाद पुलिस उन्हें शनिवार की शाम थाने ले आई थी। सितंबर 2026 के मध्य में सिगोड़ी थाना परिसर (चौकीदार के कमरे) में अजय मांझी का शव फंदे से लटका मिला। पुलिस का दावा है कि उन्होंने गमछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वहीं अजय मांझी की पत्नी और परिजनों ने पुलिस के आत्महत्या के दावे को पूरी तरह खारिज किया है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ बुरी तरह मारपीट की, और इस मामले को रफा-दफा करने के लिए 50,000 रुपये की घूस मांगी गई थी। पैसे न देने पर उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और बाद में इसे सुसाइड का रूप दे दिया गया।
मृतक की पत्नी ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेन्द्र पासवान से मिलकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है। विपक्षी नेताओं और स्थानीय नेताओं ने भी इस कस्टोडियल डेथ को लेकर बिहार सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में फिलहाल एक स्थानीय चौकीदार को सस्पेंड (निलंबित) किया गया है, और मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी है।










