'बीजेपी है तो मिलावट है' एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से गाड़ियां हो रही खराब, रोहिणी आचार्य का मोदी सरकार पर तीखा हमला

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण गाड़ियों में मशीनी खराबी की शिकायतें सामने आ रही हैं।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 06, 2026, 12:58:00 PM

एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य का मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि देशभर से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के कारण गाड़ियों में मशीनी खराबी की शिकायतें सामने आ रही हैं। रोहिणी आचार्य ने सवाल उठाया कि जब कई वाहन निर्माता एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के इस्तेमाल में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं, तो बिना पूरी तैयारी के यह नीति क्यों लागू की गई? रोहिणी आचार्य ने सरकार से एथेनॉल नीति पर पूरी पारदर्शिता बरतने और उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब देने की मांग की।

रोहिणी आचार्य ने एक्स (X) पर लंबी पोस्ट कर एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की नीति पर सरकार को घेरा है। रोहिणी ने पूछा कि क्या सरकार ने सभी वाहनों की एथेनॉल के साथ अनुकूलता की जांच कराई थी और जनता को भरोसे में लिया था? आरोप लगाया कि नीति के नाम पर आम जनता को "प्रयोगशाला" बनाया जा रहा है। रोहिणी आचार्य ने एक्स (X) पर पोस्ट करते हुए लिखा है-एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के मुद्दे पर जवाबदेही से बच रही है मोदी सरकार .. पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की वजह से देश भर से गाड़ियों में मशीनी खराबी आने की शिकायतें सामने आ रहीं हैं, आम जनता के बीच रोष कायम होता दिख रहा है , बावजूद इसके इस मसले पर जवाबदेही से बच एवं कतरा रही है मोदी सरकार.. 

रोहिणी आगे लिखती हैं-जनता के सवाल बहुतेरे हैं और सवालों का जवाब पाने का हक़ भी है देश की जनता को, मोदी सरकार को बताना होगा कि किस नीति के नाम पर आम जनता की गाड़ियों के साथ समझौता किया जा रहा है, जब वाहन निर्माता ही इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के प्रयोग में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं, तो बिना जाँचे - परखे यह प्रयोग क्यों किया जा रहा है ?? 

रोहिणी ने कहा-जनहित के नाम पर क्षति देने वाली इस नीति का नुकसान आखिर जनता क्यों उठाए ? क्या मोदी सरकार ये बता सकती है कि एथेनॉल मिश्रण से पहले हर वाहन की अनुकूलता सुनिश्चित की गई और आम जनता को भरोसे में लिया गया ? नीति के नाम पर जनता को प्रयोगशाला बनाने के पीछे की मंशा क्या ?

मोदी सरकार को ये समझना होगा कि नीति वही सफल होती है ,जो जनता का विश्वास जीतती है और नीति का मूल्यांकन व् निर्धारण सवालों व् विमर्श से होता है, हड़बड़ी में 'किसी विशेष' को फायदा पहुँचाने के मकसद से लिए गए एकतरफा निर्णय से नहीं ,  ऐसे में ये सवाल खड़ा होना लाजिमी है कि ईंधन नीति पर पारदर्शिता क्यों नहीं बरती गयी ? 

एथेनॉल नीति पर सरकार की ओर से तथ्यों को प्रस्तुत किया जाना और जनता के सवालों का जवाब दिया जाना, दोनों ज़रूरी हैं, मगर तथ्यों को देश की जनता के सामने रखने व् उठ रहे सवालों का तार्किक जवाब देने से क्यों परहेज कर रही है सरकार ?