आनंद मोहन फिर जाएंगे जेल? रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कई अहम सवाल उठाए।

By : स्वराज पोस्ट | Edited By: Amit Kumar
Updated at : Jul 17, 2026, 10:55:00 AM

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूर्व सांसद आनंद मोहन की समय से पहले रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। यह मामला 1994 में गोपालगंज के तत्कालीन जिलाधिकारी जी. कृष्णैया की हत्या से जुड़ा है, जिसमें आनंद मोहन उम्रकैद की सजा काट रहे थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कई अहम सवाल उठाए। 

कोर्ट ने कहा कि ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी अधिकारी की हत्या को 'दुर्लभतम' मामला क्यों नहीं माना गया? पीठ ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसी सोच अपराधियों को गलत संदेश दे सकती है कि सरकारी कर्मचारी की हत्या करने के बाद भी राहत मिल सकती है। 

दरअसल, इस मामले में मुजफ्फरपुर की ट्रायल कोर्ट ने 2007 में आनंद मोहन को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, 2008 में पटना हाईकोर्ट ने इसे बदलकर कठोर उम्रकैद कर दिया और 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद 2023 में बिहार सरकार ने जेल नियमों में संशोधन किया। 

पहले ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारी की हत्या के दोषियों को समय से पहले रिहा नहीं किया जा सकता था, लेकिन इस रोक को हटाए जाने के बाद आनंद मोहन समेत कई अन्य कैदियों की रिहाई का रास्ता खुल गया। आनंद मोहन 27 अप्रैल 2023 को सहरसा जेल से रिहा हुए। इस फैसले का जी. कृष्णैया की पत्नी उमा कृष्णैया और उनकी बेटी ने विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना है कि सरकार ने नियम बदलकर न्याय के साथ समझौता किया है। 

बता दें कि 5 दिसंबर 1994 को गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी. कृष्णैया मुजफ्फरपुर से गुजर रहे थे। उसी दौरान गैंगस्टर छोटन शुक्ला की शवयात्रा निकाल रही उग्र भीड़ ने उनकी गाड़ी रोक ली, उन्हें बाहर खींचा और पीट-पीटकर हत्या कर दी। उस समय बिहार पीपुल्स पार्टी के नेता और तत्कालीन विधायक आनंद मोहन पर भीड़ को उकसाने का आरोप लगा था, जिसके बाद उन्हें इस मामले में दोषी ठहराया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आनंद मोहन की समय से पहले मिली रिहाई बरकरार रहेगी या फिर सुप्रीम कोर्ट इस पर बड़ा फैसला सुनाएगा? इस फैसले का इंतजार सिर्फ पीड़ित परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार की राजनीति और न्याय व्यवस्था भी कर रही है।

पटना से आभा की रिपोर्ट