बिहार के राजनीतिक दलों का यूपी में कोई वजूद नहीं, हम तो सवाल पूछेंगे: अरविंद राजभर
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बिहार के दो प्रमुख राजनीतिक दल और एनडीए में शामिल जनता दल यूनाइटेड और लोजपा रामविलास ने स्पष्ट कर दिया है कि वो भी उत्तर प्रदेश में चुनाव लडेंगीं।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। बिहार के दो प्रमुख राजनीतिक दल और एनडीए में शामिल जनता दल यूनाइटेड और लोजपा रामविलास ने स्पष्ट कर दिया है कि वो भी उत्तर प्रदेश में चुनाव लडेंगीं। लोजपा रामविलास का कहना है कि यूपी में अगर एनडीए के साथ गठबंधन होता है तो बेहतर है नहीं तो उनकी पार्टी राज्य के सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लडेगी। वहीं सूत्रों की माने तो जदयू भी एनडीए गठबंधन के तहत राज्य में चुनाव लडना चाहती है। इसी बात पर राजनीतिक घमासान छिड गया है। यूपी में एनडीए के अहम सहयोगी दल और सरकार में शामिल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी का कहना है कि अगर यह दोनों पार्टियों यूपी में चुनाव लडेंगी तो हम सवाल पूछेंगे।
स्वराज पोस्ट नवदृष्टि के साथ इस विषय पर विशेष बातें करते हुए सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सह यूपी सरकार के पूर्व मंत्री अरविंद राजभर ने कहा कि बिहार में जब हमारी पार्टी विधानसभा चुनाव में एनडीए के बैनर तले चुनाव लडने की कोशिश कर रही थी तब हमारी ताकत को नजर अंदाज करते हुए नकार दिया गया था और हमें वहां एनडीए में शामिल नहीं किया गया था। तब बाध्य होकर हमने अकेले अपने दम पर चुनाव लडा था और शानदार प्रदर्शन किया था। उसी प्रकार जब वहां की पार्टियां यहां चुनाव लडेंगी तो हम सवाल तो पूछेंगे। जो नियम हमारी लिए तब था, वह नियत इन पार्टियों के लिए यहां क्यों नहीं लागू होगा?
अरविंद ने यह भी कहा कि यूपी में जदयू और लोजपा रामविलास का न तो संगठन है, न कार्यकर्ता हैं और न हीं जनसमर्थन है न हीं उस प्रकार के स्टैंड है, जिससे यूपी की जनता में यह संदेश जाए कि यह पार्टियां जनहित में कार्य करेंगी। जब हम बिहार में गए थे तो बीजेपी के संगठन ने हमें तवज्जों क्यों नहीं दिया? हमारी बातें क्यों नहीं सुनी गयी? हमारी बातें और बिहार में हमारी ताकत को महसूस क्यों नहीं किया गया? शीर्ष नेतृत्व से लेकर निचले स्तर तक जब बात हो रही थी तो हमें तब उचित स्थान देना चाहिए था। जब हमारा विरोध यह कहकर किया गया कि यूपी की पार्टी का यहां कोई काम नहीं है, तो मेरा स्पष्ट कहना है कि बिहार की पार्टी का यूपी में कोई काम नहीं है।
अरविंद राजभर ने सपा और कांग्रेस के नेताओं के तालमेल वाली बयान पर तंज कसते हुए कहा कि ये थ्री इडियट हैं। इनमें कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन है, सॉल्यूशन का पता नहीं। जहां तक अखिलेश यादव पीडीए की बात कहते हैं, तो वह पीडीए, एनडीए के साथ खडा है। यूपी में योगी आदित्यनाथ का राज कायम था, कायम है और कायम रहेगा। हम सुभासपा के हैं। हमारी कोशिश ज्यादा से ज्यादा सीटों पर बीजेपी के साथ सहयोग कर के प्रचंड जीत हासिल करने की है।
बता दें कि एनडीए के अहम घटक दल में शुमार होने वाले जदयू की तरफ से यह बात कही गयी है कि वह आगामी यूपी विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतार सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और बिहार सरकार में मंत्री निशांत और श्रवण कुमार ने हाल के दिनों में मिर्जापुर और वाराणसी की यात्रा भी की थी। जिसे पार्टी की चुनावी तैयारियों का शंखनाद माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों और प्रवक्ताओं के अनुसार, जेडीयू शुरुआती तौर पर करीब 60 सीटों पर अपनी दावेदारी और संगठन को मजबूत करने की तैयारी में जुटी है, हालांकि अंतिम निर्णय सीटों के बंटवारे और नेतृत्व पर निर्भर करेगा। पार्टी का मुख्य फोकस पूर्वांचल और बिहार से सटे जिलों पर है, जहां कुर्मी, कुशवाहा और पटेल मतदाताओं की अच्छी खासी संख्या है।
वहीं लोजपा रामविलास भी यूपी की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन का विस्तार कर रही है और चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है। इसके तहत पार्टी ने 101 सीटों पर प्रभारियों की नियुक्ति भी की है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के अनुसार यूपी में अगर उनका एनडीए के साथ गठबंधन होता है तो यह अच्छी बात होगी, अन्यथा पार्टी अकेले भी चुनाव लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। यह भी स्पष्ट किया गया था कि गठबंधन का स्वरूप क्या होगा, इसका फैसला समय आने पर किया जाएगा।
इन दोनों की ही पार्टियों की तरफ से विधानसभा चुनाव के लिए उठाये गये इस राजनीतिक कदम की खबरों के बाद सुभासपा की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आयी है।










