बसपा के लिए बड़ा सवाल, खतरे में राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा !
उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम खबर है। दरअसल, कभी राज्य की सत्ता में चार बार सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज पर खतरा मंडरा रहा है।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अहम खबर है। दरअसल, कभी राज्य की सत्ता में चार बार सरकार बनाने वाली बहुजन समाज पार्टी (BSP) के राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज पर खतरा मंडरा रहा है। दरअसल, यह पहला मौका होगा जब लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा और विधान परिषद में इस पार्टी की संख्या शून्य होने के बाद पार्टी का राज्यसभा में भी कोई सदस्य नहीं रहेगा। इन सदनों में संख्या शून्य हो जाने के बाद पार्टी का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खतरे में दिखने लगा है।
उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पार्टी का केवल एक विधायक था
दरअसल, उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पार्टी का केवल एक विधायक था। 2022 के विधानसभा चुनाव में बलिया की रसड़ा विधानसभा सीट पर उमाशंकर सिंह ने जीत हासिल की थी। उमाशंकर सिंह का हाल ही में निधन हो गया। जिसके कारण विधानसभा में पार्टी की उपस्थिति शून्य हो गयी है। इसी तरह बसपा का न तो लोकसभा में कोई सदस्य है और न ही यूपी विधान परिषद में कोई सदस्य है। जहां तक राज्यसभा की बात है तो यहां पार्टी के एकमात्र सदस्य रामजी गौतम हैं। गौतम का कार्यकाल भी इसी साल 25 नवंबर को पूरा हो रहा है। इस प्रकार बसपा का वर्तमान राजनीतिक हालात में लोकसभा, विधान सभा और विधान परिषद में पहले से ही उपस्थिति नहीं है और एकमात्र राज्यसभा सांसद का कार्यकाल पूरा होने के बाद वहां भी उपस्थिति शून्य हो जाएगी। यानि दो माह के बाद ऐसा राजनीतिक दृश्य सामने आ सकता है जबकि चारों में से किसी सदन में बसपा की तरफ से कोई नुमाइंदगी नहीं होगी।
BSP का एक भी विधायक नहीं होने की स्थिति में पार्टी राज्यसभा व विधान परिषद सदस्य के लिए चुनाव लडने की हालत में नहीं है
यूपी की राजनीतिक स्थिति के अनुसार, बसपा का एक भी विधायक नहीं होने की स्थिति में पार्टी राज्यसभा और विधान परिषद सदस्य के लिए चुनाव लडने की हालत में नहीं है। संख्या बल शून्य होने के बाद राज्यसभा चुनाव के बाद बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा फिर खतरे में पड़ने की बात सामने आ रही है। ज्ञात हो कि कांशीराम ने 1984 में बसपा की स्थापना की थी और 13 साल के बाद 1997 में पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था। 2025 में चुनाव आयोग ने बसपा का राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा बरकरार रखा था। प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में सबकी नजरें अब बसपा की तरफ टिक गयी हैं। क्योंकि यही चुनाव बसपा के राष्ट्रीय पार्टी होने के भविष्य को तय कर सकते हैं। पार्टी सुप्रीमो और यूपी की चार बार सीएम रही मायावती जोर शोर से प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगी हैं।
BSP का प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक सफर पिछले डेढ़ दशक से काफी उथल पुथल वाला रहा है
बसपा का प्रदेश की राजनीति में राजनीतिक सफर पिछले डेढ़ दशक से काफी उथल पुथल वाला रहा है। हालांकि 2019 में जब बसपा और सपा का गठबंधन था, तब पार्टी के दस प्रत्याशी सांसद बने थे। 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने रसड़ा सीट से पर जीत हासिल की थी। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बसपा का खाता भी नहीं खुल पाया था। 2019 के बाद बसपा ने किसी भी दल के साथ गठबंधन नहीं किया है। इसके अलावा हर चुनाव में पार्टी के वोट प्रतिशत में गिरावट भी सामने आयी है। यानि बसपा के सामने एक नहीं बल्कि कई चुनौतियां हैं।
ब्यूरो रिपोर्ट










