CWG 2026: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की बेटियों ने रचा इतिहास, प्रीति पवार के बाद जैस्मिन ने भी जीता गोल्ड
ग्लासगो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। खेल के 10वें दिन भारत को दो गोल्ड मेडल मिला है। हरियाणा की बेटी प्रीति पवार ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। जैसमिन ने भारत की झोली में एक और गोल्ड मेडल डाल दिया है

ग्लासगो में खेले जा रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है। खेल के 10वें दिन भारत को दो गोल्ड मेडल मिला है। हरियाणा की बेटी प्रीति पवार ने गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। महिलाओं के 54 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में प्रीति ने कनाडा की स्कारलेट सावेना डेलगाडो को एकतरफा अंदाज में मात दी। भिवानी की प्रीति ने 54 किलो भारवर्ग में बॉक्सिंग में गोल्ड मेडल जीता है। प्रीति ने यह मुकाबला 5-0 से जीती है। वहीं, दूसरी तरफ भिवानी की ही जैसमिन ने भारत की झोली में एक और गोल्ड मेडल डाल दिया है। उन्होंने 57 किलोग्राम भारवर्ग में यह मेडल जीता है। जैस्मिन लंबोरिया की जीत के साथ भारत ने बॉक्सिंग में दूसरा गोल्ड हासिल कर लिया।
कॉमनवेल्थ खेल 2026 में सबसे पहले प्रीति पवार ने महिला 54 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर इस संस्करण में बॉक्सिंग में भारत का पहला गोल्ड दिलाया। इसके कुछ ही देर बाद जैस्मिन लंबोरिया ने भी महिला 57 किग्रा वर्ग का खिताब अपने नाम कर भारत की झोली में दूसरा गोल्ड मेडल डाल दिया। बर्मिंघम में कांस्य जीतने वाली जैस्मिन ने इस बार रिंग में शानदार प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया। वर्ल्ड चैंपियन जैस्मिन लंबोरिया ने महिलाओं के 57 किग्रा वर्ग के फाइनल मुकाबले में उत्तरी आयरलैंड की मौजूदा चैंपियन और तीन बार की कॉमनवेल्थ मेडलिस्ट मिकेला वॉल्श को 5-0 से हराकर ऐतिहासिक गोल्ड मेडल जीता है। जैस्मिन लंबोरिया की इस स्वर्णिम जीत के साथ ही भारत को ग्लासगो 2026 में अपना 7वां स्वर्ण पदक मिला। मुक्केबाजी रिंग में भारत का यह लगातार दूसरा गोल्ड मेडल रहा।
23 अक्टूबर 2003 को हरियाणा के भिवानी जिले में जन्मी प्रीति पवार को खेल का माहौल विरासत में मिला क्योंकि उनके माता-पिता दोनों ही पूर्व एथलीट रहे हैं। हालांकि, शुरुआत में प्रीति की बॉक्सिंग में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। 14 साल की उम्र में उनके जीवन में मोड़ आया, जब उनके चाचा विनोद साई पवार, जो खुद एक पूर्व राष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाज हैं ने उनके भीतर की प्रतिभा को पहचाना। वहीं 24 वर्षीय जैस्मिन लंबोरिया ने भिवानी की गलियों से निकलकर राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता, ओलंपियन और अब वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियन बनने तक का सफर तय किया है।
राष्ट्रमंडल खेलों के 10वें दिन भारत को बॉक्सरों ने स्वर्णिम शुरुआत दिलाई है। पहले प्रीति पवार ने गोल्डन पंच लगाया तो उनके बाद जैस्मिन लैंबोरिया ने स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा पुरुषों की ट्रिपल जंप में प्रवीण के खाते में सिल्वर आया तो सेल्वा के खाते में ब्रॉन्ज आया। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत ने कुल 27 मेडल अपने नाम कर लिए हैं, जिनमें 7 गोल्ड, 13 सिल्वर और 7 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं। इनमें से दो स्वर्ण पदक आज ही मुक्केबाजी में मिले हैं, जहां प्रीति पवार और जैस्मिन लंबोरिया ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया।
बता दें कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नई दिल्ली 2010 में रहा, जब मेजबान टीम ने 39 स्वर्ण, 26 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 101 पदक जीतकर पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया था। यह अब तक का एकमात्र अवसर है जब भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स में 100 से अधिक पदक जीते। वहीं, बर्मिंघम 2022 में भारत ने 22 स्वर्ण, 16 रजत और 23 कांस्य सहित कुल 61 पदक जीतकर चौथा स्थान हासिल किया था। हालांकि, ग्लासगो 2026 में प्रतियोगिताओं की संख्या कम कर दी गई है। इस बार कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस और हॉकी समेत नौ खेलों को कार्यक्रम से बाहर रखा गया है।













