अब बदलेंगे जातिसूचक और आपत्तिजनक नाम, सड़कों-मोहल्लों के नामकरण के लिए नई नियमावली लागू

झारखंड सरकार ने राज्य के शहरी इलाकों में मौजूद जातिसूचक, भेदभावपूर्ण और सामाजिक रूप से आपत्तिजनक नामों को बदलने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। शहरी विकास एवं आवास विभाग ने सड़कों, मोहल्लों, कॉलोनियों और अन्य सार्वजनिक स्थलों के नामकरण एवं संख्यांकन से संबंधित नई नियमावली को अधिसूचित कर दिया है। इसके लागू होने के बाद किसी भी नगर निकाय में ऐसे नामों को मान्यता नहीं मिलेगी जो जातीय, सांप्रदायिक या किसी वर्ग, समुदाय अथवा लिंग के प्रति अपमानजनक माने जाएं। साथ ही नामकरण और नाम परिवर्तन से जुड़े अंतिम निर्णय का अधिकार राज्य सरकार के नामित 'नामकरण प्राधिकार' के पास रहेगा।
नई व्यवस्था के तहत सभी नगर निकायों को नियम लागू होने के 30 दिनों के भीतर एक विशेष सर्वेक्षण दल गठित करना होगा। नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी के नेतृत्व में बनने वाली यह टीम अपने क्षेत्र की सभी सड़कों, गलियों, कॉलोनियों और सार्वजनिक स्थानों का निरीक्षण कर ऐसे नामों की पहचान करेगी जो नए मानकों के अनुरूप नहीं हैं। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद 90 दिनों में रिपोर्ट संबंधित नगरपालिका को सौंपी जाएगी, जिसके बाद निकाय अपनी अनुशंसा के साथ 30 दिनों के भीतर मामला विभाग के माध्यम से राज्य स्तरीय समिति को भेजेगा।
नामकरण संबंधी सभी प्रस्तावों की समीक्षा के लिए सरकार ने एक उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय नामकरण एवं युक्तिकरण समिति का गठन भी किया है। इसकी अध्यक्षता नगरपालिका प्रशासन के निदेशक करेंगे। समिति में संबंधित जिले के उपायुक्त द्वारा नामित अपर समाहर्ता स्तर के अधिकारी, संबंधित नगर निकाय के नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी, गृह विभाग का संयुक्त सचिव स्तर का प्रतिनिधि, संबंधित निर्माण विभाग का अधिकारी तथा विभाग का संयुक्त सचिव या उप सचिव सदस्य-सचिव के रूप में शामिल होंगे। यह समिति प्रत्येक प्रस्ताव और सर्वेक्षण रिपोर्ट का परीक्षण कर 60 दिनों के भीतर अपनी अनुशंसा नामकरण प्राधिकार को भेजेगी।
नई नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे नाम स्वीकार नहीं किए जाएंगे जो जाति, धर्म, समुदाय, लिंग या किसी सामाजिक वर्ग के प्रति अपमानजनक हों। इसके अलावा ऐसे नाम भी प्रतिबंधित रहेंगे जो पहले से मौजूद नामों से मिलते-जुलते होने के कारण डाक, पुलिस, राजस्व या आपातकालीन सेवाओं में भ्रम पैदा कर सकते हैं। अशोभनीय, भड़काऊ या सामाजिक वैमनस्य फैलाने वाले नामों पर भी रोक रहेगी। किसी जीवित व्यक्ति के नाम पर सड़क या सार्वजनिक स्थल का नाम रखने के लिए राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी, जबकि नैतिक अधःपतन या राज्य विरोधी अपराधों में दोषसिद्ध व्यक्तियों के नाम पर नामकरण की अनुमति नहीं दी जाएगी।
यदि किसी नई सड़क या कॉलोनी का निर्माण होता है तो संबंधित नगरपालिका को 90 दिनों के भीतर नियमों के अनुरूप नाम प्रस्तावित करना होगा। नगर परिषद की स्वीकृति मिलने के बाद अंतिम मंजूरी के लिए प्रस्ताव नामकरण प्राधिकार के पास भेजा जाएगा। वहीं किसी पुराने नाम में बदलाव की पहल नगरपालिका स्वयं कर सकती है या संबंधित वार्ड के कम से कम एक-चौथाई पंजीकृत मतदाताओं के हस्ताक्षरयुक्त आवेदन के आधार पर प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। ऐसे मामलों में प्रस्ताव को स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित कर 30 दिनों तक आम जनता से आपत्तियां और सुझाव भी आमंत्रित किए जाएंगे।
हालांकि, यदि किसी मामले में मानवाधिकार आयोग, न्यायालय या किसी अन्य वैधानिक संस्था का निर्देश प्राप्त होता है तो नामकरण प्राधिकार बिना सार्वजनिक सूचना की औपचारिक प्रक्रिया पूरी किए भी तत्काल नाम परिवर्तन का आदेश जारी कर सकेगा।
सरकार ने यह भी तय किया है कि स्वीकृत नामों को हिंदी और अंग्रेजी अथवा अन्य स्थानीय अनुसूचित भाषा में निर्धारित प्रारूप वाले नेम-बोर्ड पर प्रदर्शित किया जाएगा। सड़क या मोहल्ले के दोनों सिरों और प्रवेश द्वारों पर इन बोर्डों को लगाया जाएगा। नाम परिवर्तन के बाद संबंधित परिसरों के यूनिक प्रिमाइसेस नंबर और सरकारी अभिलेख 60 दिनों के भीतर अद्यतन किए जाएंगे तथा इसके लिए स्थानीय निवासियों या संपत्ति मालिकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
नियमों के उल्लंघन पर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति सरकारी नेम-बोर्ड या नंबर को क्षति पहुंचाता है, हटाता है, उसमें बदलाव करता है या बिना अनुमति किसी अन्य नाम का प्रदर्शन करता है तो उसके खिलाफ झारखंड नगरपालिका अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नई नियमावली नगर निकायों के पुराने उपनियमों पर प्रभावी रहेगी और किसी प्रकार के विरोधाभास की स्थिति में इसी के प्रावधान लागू होंगे।













