संयुक्त राष्ट्र में झारखंड का परचम, डॉ. बेंजामिन बाड़ा को मिली बड़ी जिम्मेदारी

झारखंड के गुमला जिले के भरनो प्रखंड स्थित पंडरानी गांव के रहने वाले डॉ. ए. बेंजामिन बाड़ा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल कर राज्य और देश का गौरव बढ़ाया है। स्विट्जरलैंड के जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र (यूएन) मुख्यालय में आयोजित 19वें एक्सपर्ट मैकेनिज्म ऑन द राइट्स ऑफ इंडिजिनस पीपुल्स (EMRIP) के दौरान उन्हें आदिवासी भाषाओं पर केंद्रित विशेष सत्र का सह-अध्यक्ष (को-चेयर) बनाया गया।
इस वैश्विक मंच पर डॉ. बाड़ा ने स्वदेशी भाषाओं के संरक्षण, उनके विकास और आदिवासी समुदायों के भाषाई अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया। उन्होंने विभिन्न देशों से आए प्रतिनिधियों के समक्ष भारत, विशेषकर झारखंड की समृद्ध आदिवासी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता से प्रस्तुत किया तथा इसके संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया।
जानकारी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के इस प्रतिष्ठित मंच पर आदिवासी भाषाओं से जुड़े सत्र की सह-अध्यक्षता करने वाले वे पहले आदिवासी प्रतिनिधि हैं। उनकी यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर आदिवासी समुदायों की भागीदारी को नई मजबूती देने के साथ-साथ स्वदेशी भाषाओं को अंतरराष्ट्रीय विमर्श में अधिक महत्व दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
डॉ. बेंजामिन बाड़ा की इस सफलता से गुमला, भरनो और पूरे झारखंड में खुशी का माहौल है। सामाजिक संगठनों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने इसे राज्य के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उन्हें बधाई दी है। उनका कहना है कि यह सम्मान न केवल आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत करेगा, बल्कि युवाओं को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रेरित भी करेगा।
डॉ. बाड़ा की इस उपलब्धि को झारखंड के आदिवासी समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है, जिसने स्थानीय पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का नया उदाहरण पेश किया है।













