पेपर लीक पर सबसे बड़ा प्रहार! राष्ट्रपति ने नए कानून को दी मंज़ूरी

देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने कानूनी व्यवस्था को और कठोर बना दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और शीघ्र न्याय सुनिश्चित करने का रास्ता साफ हो गया है।
कानून मंत्रालय द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह संशोधन कानून का रूप ले चुका है। इससे पहले संसद के दोनों सदनों ने इस सप्ताह विधेयक को पारित किया था। संशोधित कानून का उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों की जांच और सुनवाई तय समय-सीमा के भीतर पूरी करना है।
नए प्रावधानों के तहत प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश को ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतें गठित करने का अधिकार दिया गया है। इन अदालतों में मामलों की रोजाना सुनवाई होगी और आरोपपत्र दाखिल होने की तिथि से तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, जांच एजेंसियों को भी निर्देशित किया गया है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की जांच अधिकतम दो महीने के भीतर पूरी की जाए।
संशोधित कानून में केंद्र सरकार को आवश्यकता पड़ने पर विशेष जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) गठित करने का अधिकार भी दिया गया है। इसके अलावा राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे मामलों की प्रभावी पैरवी के लिए एक या एक से अधिक विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति कर सकेंगे।
कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के लिए दंड भी पहले से अधिक कठोर किया गया है। यदि कोई व्यक्ति प्रश्नपत्र लीक करने या परीक्षा में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने का दोषी पाया जाता है, तो उसे न्यूनतम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है। इसके साथ ही उस पर 50 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड भी लगाया जा सकेगा।
यदि अपराध संगठित गिरोह या नेटवर्क के माध्यम से किया गया हो, तो सजा और भी सख्त होगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम सात वर्ष के कारावास के साथ 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है।
संशोधित कानून में न्यायिक प्रक्रिया को भी समयबद्ध बनाने पर जोर दिया गया है। किसी भी फैसले, सजा या आदेश के खिलाफ अपील संबंधित हाई कोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ के समक्ष की जाएगी और अपील स्वीकार होने के बाद उसका निस्तारण भी तीन महीने के भीतर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार का मानना है कि इन नए प्रावधानों से भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की निष्पक्षता मजबूत होगी, पेपर लीक जैसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगेगा और परीक्षार्थियों का परीक्षा प्रणाली पर विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।













