विधान परिषद का बदलता गणित, भाजपा सबसे बड़ी ताकत, एनडीए मजबूत, विपक्ष के सामने चुनौती
बिहार विधानसभा चुनाव की आहट तेज होते ही अब विधान परिषद का राजनीतिक गणित भी पूरी तरह बदल चुका है। 75 सदस्यीय उच्च सदन की मौजूदा तस्वीर यह बताती है कि एनडीए न सिर्फ मजबूत स्थिति में है, बल्कि सदन में उसकी राजनीतिक बढ़त भी साफ दिखाई दे रही है।
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव की आहट तेज होते ही अब विधान परिषद का राजनीतिक गणित भी पूरी तरह बदल चुका है। 75 सदस्यीय उच्च सदन की मौजूदा तस्वीर यह बताती है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) न सिर्फ मजबूत स्थिति में है, बल्कि सदन में उसकी राजनीतिक बढ़त भी साफ दिखाई दे रही है।
सबसे बड़ी बात यह है कि भारतीय जनता पार्टी 25 सदस्यों के साथ परिषद की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है। लंबे समय तक परिषद में सबसे बड़े दल का तमगा रखने वाली राष्ट्रीय जनता दल अब 15 सदस्यों के साथ तीसरे स्थान पर पहुंच गई है। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) 19 सदस्यों के साथ दूसरे स्थान पर कायम है। आंकड़ों की यह तस्वीर सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का भी संकेत देती है।
विधान परिषद की मौजूदा संरचना में भाजपा के बढ़े हुए संख्याबल ने पार्टी के आत्मविश्वास को नई मजबूती दी है। जदयू के साथ मिलकर एनडीए उच्च सदन में पहले से कहीं अधिक प्रभावशाली स्थिति में है। दूसरी ओर, राजद अब भी प्रमुख विपक्षी दल की भूमिका में है, लेकिन घटी हुई संख्या विपक्ष के सामने नई रणनीति बनाने की चुनौती भी खड़ी करती है।
यदि दलवार स्थिति पर नजर डालें तो भाजपा के 25, जदयू के 19 और राजद के 15 सदस्य हैं। इसके अलावा 7 निर्दलीय सदस्य सदन में मौजूद हैं। कांग्रेस के 2 सदस्य हैं, जबकि हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (सेक्युलर), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भाकपा (माले) लिबरेशन और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का एक-एक सदस्य परिषद में है। अन्य दलों के तीन सदस्य भी सदन का हिस्सा हैं।
राजनीति के जानकार मानते हैं कि विधान परिषद का यह नया समीकरण आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही पर सीधा असर डालेगा। सरकार के लिए विधायी कामकाज अपेक्षाकृत आसान होगा, वहीं विपक्ष को सरकार को घेरने के लिए पहले से अधिक समन्वय और आक्रामक रणनीति अपनानी होगी।
बिहार की राजनीति में अक्सर विधान परिषद को शांत सदन माना जाता है, लेकिन जब चुनावी मौसम करीब हो, तब यही सदन राजनीतिक संदेश देने का सबसे बड़ा मंच बन जाता है। मौजूदा संख्या बल यही संकेत दे रहा है कि बिहार की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है, जहां हर संख्या का अपना अलग राजनीतिक अर्थ है और हर दल अपनी ताकत को चुनावी संदेश में बदलने की तैयारी में जुटा है।
अनूप नारायण सिंह की कलम से
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