यश डबास बने डूसू अध्यक्ष, निर्दलीय दीपांशु शौकीन बने उपाध्यक्ष, एनएसयूआई का सूपड़ा साफ!
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुख्य 4 में से 3 सीटों पर ऐतिहासिक कब्जा जमाया है.

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुख्य 4 में से 3 सीटों पर ऐतिहासिक कब्जा जमाया है. अध्यक्ष पद पर एबीवीपी उम्मीदवार यश डबास ने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को कांटे की टक्कर में डूसू अध्यक्ष का ताज अपने नाम किया. वहीं, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने बड़ी बढ़त के साथ जीत दर्ज की. एबीवीपी ने सचिव पद पर भी अपना कब्जा बरकरार रखा, जबकि एनएसयूआई को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है और वह मुख्य सीटों की रेस में पिछड़ गई. उपाध्यक्ष पद पर जीते निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने 13,705 वोटों के अंतर से एबीवीपी और एनएसयूआई को हराकर सबको सकते में डाल दिया है.
अध्यक्ष पद का चुनाव जीतने वाले यश डबास अंतरराष्ट्रीय स्तर के पूर्व टेनिस खिलाड़ी रहे हैं और उन्होंने स्पेन, ऑस्ट्रेलिया व सर्बिया में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. कैंपस लॉ सेंटर से वकालत की डिग्री लेने के बाद वर्तमान में बुद्धिस्ट स्टडीज में मास्टर्स कर रहे यश डबास ने महिला सुरक्षा, पिंक बूथ, वामिका वैन और हॉस्टल सुविधाओं को अपना प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाया था. दिल्ली हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के चलते कैंपस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और किसी भी प्रकार के विजय जुलूस पर पूरी तरह पाबंदी लागू है.
चुनाव को शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने कैंपस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. अलग-अलग जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी और वैलिड आईडी कार्ड के बिना छात्रों को कॉलेज परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं थी. डूसू चुनाव के दौरान कैंपस में शक्ति प्रदर्शन, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले और हुड़दंगबाजी के मामलों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाया था. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और डीयू प्रशासन से सवाल किया था कि भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बावजूद नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ.
भाजपा के छात्र संगठन एबीवीपी के यश डबास ने अध्यक्ष पद पर कड़े मुकाबले में जीत हासिल की है. उन्होंने एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा को पटखनी देकर अध्यक्ष पद का ताज अपने नाम किया. यश डबास को 22,576 वोट हासिल हुआ तो उसके निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा 22,523 वोट मिला है. एबीवीपी के यश डबास ने महज 53 वोटों के अंतर से जीत हासिल की है. तीसरे स्थान पर वामपंथी गठबंधन के अनाया रतूड़ी को 5,377 वोट हासिल हुआ है.
इधर, डूसू चुनाव में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला उलटफेर उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला. एनएसयूआई से बगावत कर निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरे दीपांशु शौकीन ने एकतरफा और रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत दर्ज की. दीपांशु ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी एबीवीपी के ईशू मौर्य और एनएसयूआई के उम्मीदवार को 13,705 से अधिक वोटों के विशाल अंतर से शिकस्त देकर नया इतिहास रच दिया है. निर्दलीय दीपांशु शौकीन को 30,615 वोट मिला, जबकि एबीवीपी के ईशु मौर्य को 16,910 वोट और एनएसयूआई के वीर छत्ररत राठौर 4,313 वोट हासिल हुआ है.
संयुक्त सचिव पद पर एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह ने बेहद करीबी फाइट में जीत दर्ज की. उन्होंने 16,615 वोट पाकर एससीएस के विशेष यादव (15,778 वोट) और एनएसयूआई के गोपाल चौधरी (15206 वोट) को त्रिकोणीय मुकाबले में पीछे छोड़कर जीत हासिल किया. उधर, एबीवीपी की रिया छावड़ी ने सचिव सीट पर शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी और 21,650 वोट प्राप्त कर शानदार जीत हासिल की. उनकी निकटतम प्रतिद्वंदी एनएसयूआई की प्रत्याशी नम्रता चौधरी को 14,869 वोट मिला है.
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने सारे समीकरण बदल डाले हैं. अंतिम राउंड तक की मतगणना में 30,615 वोट के साथ दीपांशु सबसे आगे चल रहे हैं. उनके निकटतम प्रतिद्वंदी एबीवीपी की प्रत्याशी इशु मौर्या 16,910 वोट के साथ दूसरे स्थान पर हैं. दीपांशु शौकीन दिल्ली के बाहरी इलाके में बसे पीरागढ़ गांव के रहने वाले हैं. उनके पिता बस कंडक्टर और मां आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं. शौकीन ने डीयू के भगत सिंह कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है. अभी वह डिपार्टमेंट ऑफ बुद्धिस्ट स्टडीज के स्टूडेंट हैं.
दीपांशु शौकीन ने चुनाव प्रचार नंगे पैर किया. इसकी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे की घटना के बाद उन्होंने यह संकल्प लिया. उन्होंने कहा था कि नंगे पैर चलने से होने वाला दर्द उन्हें लगातार उन छात्रों की परेशानियों की याद दिलाता है, जिनकी आवाज वह उठाना चाहते हैं. दीपांशु ने कहा था कि जब तक पीड़ित छात्रों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह सत्याग्रह जारी रहेगा. दीपांशु शौकीन के पिता चाहते थे कि वह यूपीएससी क्रैक करके आईएएस बनें. लेकिन उन्होंने परिवार से साफ कह दिया कि वह राजनीति में जाना चाहते हैं. इसी सोच के साथ उन्होंने छात्र राजनीति को अपने करियर की दिशा बनाने का फैसला किया. शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार बनने से पहले एनएसयूआई से टिकट मांगा था. उनका नामांकन भी हुआ था. लेकिन संगठन की ओर से नामांकन वापस लेने को कहा गया. लेकिन शौकीन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनावी मैदान में उतर गए.
दरअसल, दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव (डूसू) में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के लिए मतदान में एबीवीपी, एनएसयूआई, आइसा-एसएफआई गठबंधन, एएसएपी और निर्दलीय प्रत्याशी समेत कुल 20 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहे. आज शनिवार को डीयू के खेल स्टेडियम के मल्टीपर्पज हॉल में मतगणना हुई.
अनूप नारायण सिंह










