कोर्ट में हिंसा बर्दाश्त नहीं! हाईकोर्ट ने जजों की सुरक्षा पर दिया बड़ा निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने लातेहार सिविल कोर्ट में अक्टूबर 2022 में हुई हिंसक घटना को न्यायपालिका की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला माना है। अदालत ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की व्यक्तिगत सुरक्षा केवल उनकी सुरक्षा तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध न्यायपालिका की स्वतंत्रता से है। हाईकोर्ट ने राज्य के सभी जिलों में न्यायिक अधिकारियों को लातेहार के अनुरूप व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई है।
चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेकर शुरू की गई जनहित याचिका पर फैसला सुनाया। आदेश के साथ अदालत ने इस याचिका का निष्पादन कर दिया।
10 अक्टूबर 2022 को टाना भगत समुदाय के बड़ी संख्या में लोग लातेहार सिविल कोर्ट परिसर में प्रवेश कर गए थे। प्रदर्शन के दौरान नारेबाजी के साथ तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की घटना हुई थी। हिंसक स्थिति के चलते अदालत का सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ था।
घटना के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि तत्कालीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सुरक्षा के लिहाज से एक कमरे में बंद होकर रहना पड़ा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने अगले दिन, 11 अक्टूबर 2022 को, स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका की कार्यवाही शुरू की थी।
"सुरक्षा के लिए घटना दोहराने का इंतजार नहीं किया जा सकता" : HC
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक परिसरों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए किसी दूसरी हिंसक घटना का इंतजार करना उचित नहीं होगा। अदालत के मुताबिक न्यायिक अधिकारियों को ऐसा माहौल मिलना चाहिए, जहां वे किसी भय, धमकी, दबाव अथवा बाहरी हस्तक्षेप के बिना अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध और प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है, लेकिन इसका इस्तेमाल अदालत की कार्यवाही रोकने, न्यायिक अधिकारियों या अन्य कर्मियों पर हमला करने और कोर्ट परिसर में हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने ऐसी घटनाओं को न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बताया।
लातेहार की मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था पर संतोष
राज्य सरकार की ओर से अदालत में दाखिल हलफनामों और प्रस्तुत जानकारी के आधार पर हाईकोर्ट ने लातेहार सिविल कोर्ट की वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था को संतोषजनक पाया। कोर्ट परिसर में सशस्त्र बलों की तैनाती के अलावा क्विक रिस्पांस टीम की व्यवस्था भी की गई है।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। परिसर की चहारदीवारी को कंटीले तारों से सुरक्षित किया गया है। संवेदनशील और हाई रिस्क अंडरट्रायल कैदियों की अदालत में पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराने की व्यवस्था भी मौजूद है। इसके अलावा कोर्ट की सुरक्षा की निगरानी के लिए नामित डीएसपी नियमित रूप से व्यवस्था का निरीक्षण करते हैं।
हाईकोर्ट ने पाया कि लातेहार में न्यायिक अधिकारियों को पर्याप्त व्यक्तिगत सुरक्षा दी जा रही है। प्रत्येक न्यायिक अधिकारी के साथ कम से कम एक बॉडीगार्ड और एक होमगार्ड उपलब्ध कराया गया है। इसी व्यवस्था को आधार बनाते हुए खंडपीठ ने राज्य के अन्य जिलों में पदस्थ न्यायिक अधिकारियों के लिए भी समान स्तर की व्यक्तिगत सुरक्षा उपलब्ध कराने की जरूरत बताई।
अदालत को बताया गया कि 2022 की हिंसक घटना से जुड़े आपराधिक मामले में हिरासत में लिए गए 40 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। कुछ अन्य आरोपियों को सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत नोटिस जारी किए गए हैं। मामले में बाकी आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच जारी है, जबकि अज्ञात आरोपियों का पता लगाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।











