झारखंड राज्यसभा चुनाव में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की दस्तक, कांग्रेस के 16 विधायक जा सकते हैं तेलंगाना
झारखंड राज्यसभा चुनाव में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की दस्तक, कांग्रेस के 16 विधायक जा सकते हैं तेलंगाना
झारखंड में राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया तेज होते ही राजनीतिक गतिविधियां भी चरम पर पहुंच गई हैं। मतदान से पहले संभावित टूट-फूट और दल-बदल की आशंकाओं को देखते हुए कांग्रेस अपने विधायकों को एक साथ रखने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस के 16 विधायकों को तेलंगाना ले जाकर एक सुरक्षित स्थान पर ठहराने की योजना बनाई जा रही है, ताकि मतदान तक किसी भी तरह की राजनीतिक हलचल का असर उनके रुख पर न पड़े। हालांकि इस संबंध में अभी तक पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
राज्य विधानसभा के मौजूदा आंकड़े महागठबंधन के पक्ष में स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस, राजद और भाकपा (माले) को मिलाकर इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दो राज्यसभा सीटों पर जीत के लिए पर्याप्त संख्या मानी जा रही है। दूसरी ओर भाजपा, आजसू, जदयू और लोजपा (रामविलास) सहित राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का आंकड़ा 24 विधायकों तक सीमित है।
इसके बावजूद चुनाव पूरी तरह एकतरफा नहीं माना जा रहा है। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी की सक्रियता ने सियासी समीकरणों को रोचक बना दिया है। नाथवानी के नामांकन प्रस्तावकों में भाजपा के कई विधायकों के साथ अन्य दलों के विधायकों के शामिल होने की चर्चाओं ने महागठबंधन, विशेषकर कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि पार्टी नेतृत्व कोई जोखिम नहीं लेना चाहता और विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रहा है।
इसी बीच रांची में इंडिया गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें चुनावी तैयारियों और संयुक्त रणनीति पर चर्चा हुई। बैठक के बाद नेताओं ने दावा किया कि गठबंधन पूरी तरह संगठित है और किसी प्रकार के मतभेद की स्थिति नहीं है। गठबंधन की ओर से दोनों सीटों पर जीत का भरोसा जताया गया। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार झामुमो के उम्मीदवार के रूप में पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम और कांग्रेस की ओर से पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के करीबी माने जाने वाले प्रणव झा नामांकन दाखिल करने वाले हैं।
कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भी गठबंधन की मजबूती का हवाला देते हुए कहा कि आवश्यक संख्या उनके पास मौजूद है और दोनों सीटों पर जीत सुनिश्चित है। उन्होंने यह भी कहा कि क्रॉस वोटिंग की आशंका बेहद नगण्य है, क्योंकि गठबंधन के सभी विधायक एकजुट होकर चुनाव लड़ रहे हैं। साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पर्याप्त संख्या नहीं होने के बावजूद विपक्ष चुनाव को अनावश्यक रूप से दिलचस्प बनाने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि सार्वजनिक तौर पर गठबंधन के नेता आत्मविश्वास दिखा रहे हैं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा लगातार जारी है कि दूसरी सीट पर मुकाबला अपेक्षा से अधिक रोमांचक हो सकता है। नाथवानी की राजनीतिक पहुंच और चुनावी प्रबंधन क्षमता को देखते हुए कांग्रेस अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। सूत्रों का कहना है कि नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद विधायकों को विशेष विमान से हैदराबाद ले जाने की योजना इसी सतर्कता का हिस्सा है।
अब राज्य की राजनीति में नजरें दो अहम तारीखों पर टिक गई हैं; नामांकन का दिन और 18 जून को होने वाला मतदान। इन दोनों चरणों के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि महागठबंधन का भरोसा सही साबित होता है या फिर चुनावी गणित में कोई अप्रत्याशित मोड़ देखने को मिलता है।